दीपावली ने रचा इतिहास, UNESCO की सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल

Edited By Updated: 10 Dec, 2025 03:18 PM

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Diwali UNESCO : भारत की संस्कृति में दीपावली का स्थान अत्यंत विशेष है और इसे देशभर में उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाता है। अब इसी दिव्य परंपरा को वैश्विक स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। संयुक्त राष्ट्र के सांस्कृतिक संगठन यूनेस्को ने दीपावली को अपनी...

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Diwali UNESCO : भारत की संस्कृति में दीपावली का स्थान अत्यंत विशेष है और इसे देशभर में उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाता है। अब इसी दिव्य परंपरा को वैश्विक स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। संयुक्त राष्ट्र के सांस्कृतिक संगठन यूनेस्को ने दीपावली को अपनी अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल कर लिया है।

दिल्ली के लाल किले में आयोजित यूनेस्को की बैठक के दौरान यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया और इसी के साथ भारत ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। खास बात यह रही कि यह पहली बार है जब ऐसी बैठक भारत में आयोजित हुई और दीपावली को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत का दर्जा मिला। यह क्षण पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्त की खुशी
दीपावली को यह सम्मान मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर आनंद व्यक्त करते हुए लिखा कि यह पर्व न केवल भारत की संस्कृति से गहराई से जुड़ा है, बल्कि हमारी सभ्यता और मूल्यों की आत्मा है। उन्होंने कहा कि दीपावली ज्ञान, धर्म और प्रकाश का प्रतीक है और यूनेस्को की सूची में शामिल होने के बाद इसकी ख्याति दुनिया भर में और बढ़ेगी। पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि भगवान श्रीराम के आदर्श यूं ही मानवता का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

भारत में गूंजा उल्लास
जैसे ही यूनेस्को ने सूची में दीपावली को जोड़े जाने की घोषणा की, लाल किले के प्रांगण में भारत माता की जय और वंदे मातरम्के  नारों से माहौल गूंज उठा। यह न सिर्फ एक निर्णय था बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक भी बन गया। यह बैठक 8 से 13 दिसंबर तक चलेगी, जिसमें कई और सांस्कृतिक विषयों पर निर्णय लिए जाएंगे।

भारत की 15 सांस्कृतिक धरोहरें अब ICH सूची में
दीपावली को शामिल किए जाने के साथ ही भारत की कुल 15 सांस्कृतिक परंपराएं यूनेस्को की अमूर्त धरोहर सूची में आ चुकी हैं। इनमें कुंभ मेला, दुर्गा पूजा, गुजरात का गरबा, योग, रामलीला, वैदिक मंत्रों का उच्चारण और विविध पारंपरिक रामायण प्रस्तुतियां शामिल हैं। यह बताता है कि भारत की सांस्कृतिक जड़ों को विश्व कितना सम्मान और महत्व देता है।


 

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