Edited By Sarita Thapa,Updated: 20 Mar, 2026 10:28 AM

उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां कैलादेवी के चैत्र लक्खी मेले का धमाकेदार आगाज़ हो चुका है। मेले के पहले ही दिन आस्था का ऐसा ज्वार उमड़ा कि पिछले कई सालों के रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए।
Karauli Kaiela Devi Temple : उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां कैलादेवी के चैत्र लक्खी मेले का धमाकेदार आगाज़ हो चुका है। मेले के पहले ही दिन आस्था का ऐसा ज्वार उमड़ा कि पिछले कई सालों के रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, उद्घाटन के दिन ही करीब 3 लाख श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में शीश नवाया।
रिकॉर्ड तोड़ शुरुआत और कनक दंडवत
मेले के पहले दिन से ही करौली की सड़कें 'जय माता दी' के जयकारों से गूंज उठी हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली से लाखों पदयात्री पैदल और कनक दंडवत करते हुए मंदिर पहुंच रहे हैं। सुबह 4 बजे मंगला आरती के साथ ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लग गईं, जो देर रात तक कम होने का नाम नहीं ले रही थीं।
आगे क्या होगा ?
प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, यह तो बस शुरुआत है। आने वाले 15-17 दिनों में श्रद्धालुओं की यह संख्या 40 से 50 लाख के पार पहुंचने की संभावना है। 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि शुरू होने के साथ ही भीड़ का असली दबाव बढ़ेगा। अष्टमी और नवमी के दिन यहां पैर रखने तक की जगह नहीं होगी।
प्रशासन की मुस्तैदी और सुरक्षा घेरा
इतनी विशाल भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने युद्ध स्तर पर तैयारी की है। करीब 1500 से ज्यादा पुलिसकर्मी और होमगार्ड के जवान तैनात किए गए हैं। मेले के चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए 320 से अधिक हाई-टेक कैमरे लगाए गए हैं। रोडवेज विभाग ने भक्तों की सुविधा के लिए 300 विशेष बसें उतारी हैं, जिनमें महिलाओं को किराए में 50% की छूट भी दी जा रही है।
पदयात्रियों के लिए सेवा शिविर
हिण्डौन से कैलादेवी तक के 50 किलोमीटर के मार्ग पर जगह-जगह भंडारे और विश्राम केंद्र बनाए गए हैं। समाजसेवी संगठनों द्वारा पदयात्रियों के लिए भोजन, ठंडे पानी और प्राथमिक चिकित्सा की मुफ्त व्यवस्था की गई है।
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