पूजा-पाठ से जुड़ी इन मान्यताओं को नहीं जानते होंगे आप

Edited By Updated: 17 Sep, 2019 05:25 PM

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हमारे हिंदू धर्म में पूजा-पाठ करने का विशेष विधान होता है। पूरे विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न करवाई जाती है,

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हमारे हिंदू धर्म में पूजा-पाठ करने का विशेष विधान होता है। पूरे विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न करवाई जाती है, वरना पूजा का कोई फल प्राप्त नहीं होता है। कई लोग बिना किसी नियम के ही पूजा कर लेते हैं, किंतु बहुत से लोग ऐसे हैं जो पूजा के हर नियम को अपनाकर ही भगवान का पूजन करते हैं। चलिए आज हम आपको बताते हैं पूजा-पाठ से जुड़ी कुछ बातों को, जो शायद कम लोग ही जानते होगें। 
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बता दें कि गणेश, शिव जी और भैरव की पूजा में तुलसी का प्रयोग नहीं किया जाता है। तुलसी केवल भगवान विष्णु की पूजा में प्रयोग होती है। 

कुंद का फूल शिव को माघ महीने को छोड़कर बाकी दिन निषेध है। 

रविवार के दिन दूर्वा व तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए। इसके साथ ही द्वादशी, संक्रांति, रविवार, पक्षान्त और संध्याकाल में तुलसीपत्र न तोड़ें जाते। 

केतकी पुष्प शिव को नहीं चढ़ाना चाहिए लेकिन इनका इस्तेमाल कार्तिक माह में विष्णु की पूजा में अवश्य करें। 
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देवताओं के सामने प्रज्जवलित दीप को फूंक मारकर बुझाना नहीं चाहिए, इसके साथ ही दीपक से दीपक भी नहीं जलाना चाहिए। इससे दरिद्रता आती है। अपनी माचिस से ही दीपक जलाना चाहिए। 

इस बात का ध्यान रखें कि शालिग्राम का आवाह्न तथा विसर्जन नहीं होता। साथ ही जो मूर्ति स्थापित हो उसमें आवाहन और विसर्जन नहीं होता। मिट्टी की मूर्ति का आवाहन और विसर्जन किया जाता है और अंत में शास्त्रीयविधि अनुसार उसका गंगा प्रवाह भी किया जाता है। 

प्रतिदिन की पूजा में सफलता के लिए दक्षिणा अवश्य चढ़ानी चाहिए। 
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आसन, शयन, दान, भोजन, वस्त्र संग्रह, विवाद और विवाह के समयों पर छींक शुभ मानी जाती है।

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