हिंदू-मुस्लिम दोनों की आस्था का प्रमुख केंद्र है गुजरात का ये मंदिर

Edited By Updated: 20 Dec, 2019 04:17 PM

dola mata temple gujarat

जहां एक तरफ़ देश में नागारिकता संशोधन बिल पास होने पर कहीं खुशी देखने को मिली तो वहीं इस पर लोगों द्वारा अपना आक्रोश भी दिखाया गया है।

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जहां एक तरफ़ देश में नागारिकता संशोधन बिल पास होने पर कहीं खुशी देखने को मिली तो वहीं इस पर लोगों द्वारा अपना आक्रोश भी दिखाया गया है। आपको बता दें  #CitizenshipAmmendmentAct2019 (CAA) नागरिकता संशोधन बिल दिसंबर की 11 तारीख़ को पास किया गया। जिसके बाद देश के बहुत से हिस्सों में परेशानी का माहौल बन गया है। आज की तारीख़ में भी लोगों द्वारा इस बिल को लेकर प्रदर्शन जारी है। मीडिया रिपोर्टस की मानें तो देश में ज्यादातर राज्य इन सबसे प्रभावित हो रहे हैं। जिस कारण कई लोगों की ये मांग है कि इस बिल को खत्म कर दिया जाना चाहिए। कहने का भाव है कि इस तरह प्रदर्शन के चलते हर कोई तनाव के माहौल में है।कहा जा रहा है हिंदू मुस्लिमों के बीच कहीं न कहीं फिर से मतभेद होना शुरू हो गया है। लेकिन इसी चिंताजनक माहौल में हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो हिंदू मुस्लिम दोनों से जुड़ा हुआ है।
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जी हां, आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन गुजरात में अहमदाबाद से तकरीबन 40 किलोमीटर दूर एक 'झूलासन' नामक गांव में डोला माता मंदिर स्थित है जो हिंदू मुस्लिम के बीच की एकता का प्रतीक है। इस मंदिर की सबसे अद्भुत बात ये है कि ये मंदिर हिंदू संप्रदाय को समर्पित है परंतु यहां पूजा एक मुस्लिम महिला की होती है। जी, आप ने बिल्कुल सही पढ़ा है। विस्तार में जानना चाहते हैं इस मंदिर के बारे में तो 1 नज़र डालें आगे बताई गई जानकारी।

बड़ी बहादुरी से सामना किया
झूलासन नामक गांव में स्थित इस गांव में डोला माता मंदिर स्थित है। जिसमें एक मुस्लिम महिला की मूर्ति है। बताया जाता है बड़ी संख्‍या में हिंदू भक्‍त मुस्‍लिम देवी की पूजा अराधना करते हैं। मंदिर को लेकर मान्‍यता प्रचलित है कि यहां पर 250 वर्ष पूर्व डोला नाम की बहादुर मुस्लिम महिला थी। एक बार जब उनके गांव में कुछ उपद्रियों ने आतंक किया तो डोला ने बड़ी बहादुरी से उनका सामना किया था। उन्‍होंने झूलासन गांव की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था।
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यहां स्थापित है एक पत्थर का यंत्र
इस मंदिर की सबसे बड़ी खास बात तो यह है कि जिस समय यह अपनी आखिरी सांस ले रही थीं। उस समय उनका शरीर एक फूल में परिवर्तित हो गया था। जिसे देखकर लोग हैरान हो गए थे। ऐसे में ग्रामीणों ने उन्‍हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इतना ही नहीं वहां पर उनकी याद में एक मंदिर का निर्माण करवाया गया। इसके बाद से यहां पर डोला माता की पूजा होने लगी। हालांकि इस मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है बल्‍कि एक पत्थर का यंत्र है। जिस पर साड़ी डालकर उसकी पूजा की जाती है। हिंदू भक्‍तों के बीच यह मान्‍यता है कि डोला माता भक्‍तों की हर मुराद पूरा करती हैं।

4 माह तक जली अखंड ज्‍योति
कहा जाता है यहां डोल माता अदृश्य शक्ति के रूप में हर पल अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। वहीं इस यहां की एक और सबसे खास बात यह है कि अंतरिक्ष यात्रि सुनीता विलियम्स के पिता जी का यह पैतृक गांव है। ऐसे में जब सुनीता विलियम्स अपनी अंतरिक्ष यात्रा पर गईं थी तो उनकी सुरक्षा के लिए यहां पर अखंड ज्योति जलाई गई थी। कहा जाता है लोगों ने डोला माता से अर्ज लगाई थी कि सुनीता विलियम्‍स अंतरिक्ष से सुकुशल वापस लौट आएं। इस अखंड ज्योति की खास बात यह रही कि यह करीब 4 महीने तक जलती रही थी।
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