Edited By Niyati Bhandari,Updated: 17 Feb, 2026 07:03 AM

Falgun Amavasya 2026: आज 17 फरवरी 2026 को फाल्गुन अमावस्या है। जानें पितृ दोष से मुक्ति के उपाय, तर्पण विधि, शनि शांति उपाय और अमावस्या का धार्मिक महत्व।
Falgun Amavasya 2026 Pitru Dosh Upay: सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों को समर्पित माना गया है। विशेष रूप से फाल्गुन मास की अमावस्या का आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व अधिक होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष 17 फरवरी 2026 को फाल्गुन अमावस्या मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन तंत्र साधना, पितृ दोष निवारण और शनि बाधा से राहत पाने के लिए किए गए उपाय शीघ्र फलदायी होते हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उन्हें जीवन में बार-बार बाधाओं, आर्थिक परेशानियों, संतान सुख में देरी और मानसिक अशांति का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में फाल्गुन अमावस्या का दिन पितरों को तर्पण और विशेष उपायों के माध्यम से प्रसन्न करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।
फाल्गुन अमावस्या का धार्मिक महत्व
अमावस्या का दिन पितरों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का विशेष अवसर होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यता है कि अमावस्या पर किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है। साथ ही पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष शांत होता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
पितृ दोष से मुक्ति के लिए करें ये उपाय
पीपल वृक्ष की पूजा
अमावस्या के दिन सुबह स्नान के बाद पीपल के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें। इसके बाद पांच प्रकार की मिठाइयां चढ़ाएं। भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए जनेऊ अर्पित करें और घी का दीपक जलाकर 5 से 7 बार परिक्रमा करें। मान्यता है कि इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।
दक्षिण दिशा में आहुति
शास्त्रों के अनुसार दक्षिण दिशा पितरों की दिशा मानी जाती है। इस दिन गोबर के उपलों को जलाकर उसकी धूनी में केसर युक्त खीर की आहुति दें। पूर्वजों का ध्यान करते हुए अपनी भूलों के लिए क्षमा प्रार्थना करें। ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
तर्पण और श्राद्ध कर्म
फाल्गुन अमावस्या पर पवित्र नदी या घर में ही तर्पण करें। श्राद्ध कर्म और पिंडदान से पितृ दोष शांत होता है। माना जाता है कि इससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
शनि पीड़ा से मुक्ति का उपाय
एक कच्चा सूत लें और उसे अपनी लंबाई के बराबर नाप लें। इसके बाद उस सूत को पीपल के वृक्ष पर लपेट दें। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से शनि की बाधा दूर होती है और नौकरी व व्यापार में उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
ज्योतिषीय मान्यता
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यदि किसी की कुंडली में पितृ दोष या शनि दोष है, तो फाल्गुन अमावस्या के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए उपाय विशेष फल देते हैं। यह दिन पूर्वजों के आशीर्वाद प्राप्त करने और जीवन की बाधाओं को दूर करने का श्रेष्ठ अवसर माना गया है।
फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी 2026 को पितृ दोष निवारण और शनि बाधा से मुक्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दिन श्रद्धा, दान, तर्पण और विशेष पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का मार्ग प्रशस्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सच्चे मन से किए गए उपाय अवश्य फल प्रदान करते हैं।