Ganesh Visarjan 2020: क्या आप जानते हैं क्यों किया जाता है गणेश जी का विसर्जन

Edited By Updated: 28 Aug, 2020 02:43 PM

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01 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ ही इस साल को गणेशोत्सव का समापन हो जाएगा। इस दिन पावन नदियों में लोग 10 दिन से घर में विराजमान गणपति की विसर्जित कर देते हैं।

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01 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ ही इस साल को गणेशोत्सव का समापन हो जाएगा। इस दिन पावन नदियों में लोग 10 दिन से घर में विराजमान गणपति की विसर्जित कर देते हैं। भाद्रपद के शुक्ल पक्ष को पड़ने वाली गणेश चतुर्थी से जुड़ी मान्यताएं लगभग लोग जानते हैं, मगर अनंत चतुर्दशी यानि इनके विसर्जन से जुड़ी कथा बहुत कम लोग जानते हैं। तो चलिए आज हम आप आपको बताते हैं कि आखिर इस दिन से संबंधित कौन सी कथा हमारे धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है।

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इससे पहले आपको बता दें अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन करने का शुभ मुहूर्त- 

गणेश विसर्जन के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त
प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) - 09:11 ए एम से 01:58 पी एम
अपराह्न मुहूर्त (शुभ) - 03:34 पी एम से 05:10 पी एम
सायाह्न मुहूर्त (लाभ) - 08:10 पी एम से 09:34 पी एम
रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) - 10:58 पी एम से 03:11 ए एम, सितम्बर 02
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ - अगस्त 31, 2020 को 08:48 ए एम बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त - सितम्बर 01, 2020 को 09:38 ए एम बजे
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ऐसे करें पूजा-
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन भगवान गणेश की विभिन्न स्वरूपों की पूजा करनी चाहिए। साथ ही साथ इस दिन इनकी प्रिय चीज़ों का भोग लगाना चाहिए, जिसमें सबसे मुख्य मोदक माना जाता है। विधि वत पूजा और आरती के बाद भक्तिभाव से विसर्जन करना चाहिए। कुछ लोग बिना पूजन विसर्जन करते हैं, जिससे गणेष भगवान की कृपा प्राप्ति नहीं होती।

विसर्जन की कथा
कथाओं के मुताबिक महर्षि वेदव्यास ने भगवान गणेश को महाभारत को लेखन कार्य की जिम्मेदारी सौंपी थीं। जिसे उन्होंने गणपति जी को बिना रूके संपूर्ण ग्रंथ लिखना था।  कहा जाता है कि महाभारत की कथा आरंभ करने के बाद जब 10 दिन जब महर्षि वेदव्यास जी ने अपनी आंखें खोलीं तो पाया कि गणेश के शरीर का तापमान बहुत बढ़ा हुआ है। उनके इस ताप को कम करने के लिए तुरंत पास के एक जलकुंड से ठंडा जल लाकर गणेश जी के शरीर पर डालना आरंभ कर दिया। कहा जाता है कि जिस दिन गणेश जी के शरीर पर जल प्रवाहित किया गया था, उस दिन भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी की तिथि थी। यही कारण है कि गणेश जी का विसर्जन चतुर्दशी की तिथि को किया जाता है। 
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