Edited By Sarita Thapa,Updated: 29 Mar, 2026 09:27 AM
हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में शाम के समय यानी गोधूलि बेला का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि यह वह समय होता है जब दिन और रात का मिलन होता है और इसी समय ब्रह्मांड में सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जाएं सबसे अधिक सक्रिय होती हैं।
Godhuli Time Vastu Tips : हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में शाम के समय यानी गोधूलि बेला का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि यह वह समय होता है जब दिन और रात का मिलन होता है और इसी समय ब्रह्मांड में सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जाएं सबसे अधिक सक्रिय होती हैं। यदि आपके घर में बिना वजह कलह रहती है, तरक्की रुकी हुई है या हमेशा पैसों की तंगी बनी रहती है, तो इसका कारण आपके घर का वास्तु दोष हो सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, गोधूलि बेला में जलाया गया एक दीपक न केवल अंधेरे को दूर करता है, बल्कि आपके जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाओं को भी जलाकर राख कर सकता है। तो आइए जानते हैं दीप प्रज्वलन के वे गुप्त नियम, जो आपकी सोई हुई किस्मत जगा सकते हैं।
क्या होती है गोधूलि बेला?
सूर्यास्त से ठीक पहले और सूर्यास्त के तुरंत बाद का समय 'गोधूलि बेला' कहलाता है। प्राचीन काल में जब गायें जंगल से चरकर वापस घर लौटती थीं, तो उनके खुरों से उड़ने वाली धूल के कारण इस समय को यह नाम दिया गया। आध्यात्मिक दृष्टि से यह समय भगवान की आराधना और घर में लक्ष्मी के आगमन का होता है।
घर के मुख्य द्वार पर दीपक
वास्तु के अनुसार, शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना सबसे अधिक प्रभावशाली माना जाता है।
नियम: दीपक को द्वार के बाहर दाहिनी ओर (बाहर निकलते समय आपका दायां हाथ) रखना चाहिए।
फायदा: मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती। यह लक्ष्मी जी के मार्ग को प्रशस्त करता है।
दीपक की दिशा का सीक्रेट नियम
दीपक जलाते समय उसकी लौ किस दिशा में है, इसका आपके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
पूर्व दिशा: यदि आप लंबी आयु और बेहतर स्वास्थ्य चाहते हैं, तो दीपक की लौ पूर्व दिशा की ओर रखें।
उत्तर दिशा: धन लाभ और करियर में उन्नति के लिए लौ को उत्तर दिशा की ओर रखना 'वास्तु का मास्टर स्ट्रोक' माना जाता है।
दक्षिण दिशा: पितरों के नाम का दीया जलाते समय ही दक्षिण दिशा का प्रयोग करें, सामान्य पूजा में इस दिशा से बचें।

तेल या घी? कौन सा दीपक है श्रेष्ठ?
वास्तु शास्त्र में दोनों का महत्व अलग-अलग समस्याओं के समाधान के लिए है।
गाय का घी: घर में सुख-शांति, सकारात्मकता और देवी लक्ष्मी की स्थायी कृपा के लिए शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं।
सरसों का तेल: यदि घर पर शनि की ढैया, साढ़ेसाती या शत्रुओं का भय है, तो सरसों के तेल का दीपक जलाना सर्वोत्तम है।
तिल का तेल: स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और वात-पित्त-कफ के संतुलन के लिए तिल के तेल का दीया जलाएं।
अखंड ज्योति या मिट्टी का दीया?
वास्तु में मिट्टी के दीपक को पंचतत्वों का प्रतीक माना जाता है। हमेशा साफ और बिना टूटा हुआ मिट्टी का दीपक इस्तेमाल करें। यदि धातु का दीपक इस्तेमाल कर रहे हैं, तो पीतल या तांबे का प्रयोग करें।
इन विशेष जगहों पर भी जलाएं दीया
वास्तु दोष को जड़ से खत्म करने के लिए घर के इन कोनों को भी रोशन करें।
तुलसी का पौधा: शाम को तुलसी के क्यारे में दीया जलाने से वैवाहिक जीवन के क्लेश दूर होते हैं।
रसोई घर: शाम के समय रसोई में पीने के पानी के स्थान के पास दीपक रखने से पितृ दोष शांत होता है और अन्न-धन की बरकत बनी रहती है।
ईशान कोण (मंदिर): घर के मंदिर में दीया जलाने से मानसिक स्पष्टता और शांति आती है।

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