Guru Purnima : कल मनाया जाएगा गुरु-शिष्य संबंधों का पर्व गुरु पूर्णिमा

Edited By Updated: 12 Jul, 2022 10:20 AM

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आदिकाल से हमारे शास्त्रों में गुरु की महिमा का वर्णन मिलता है। भारतीय संस्कृति में गुरु का पद सर्वोच्च इसलिए भी माना गया है क्योंकि शिष्य को अज्ञान रूपी अंधकार से बाहर निकाल कर गुरु ज्ञान रूपी

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Guru Purnima 2022: आदिकाल से हमारे शास्त्रों में गुरु की महिमा का वर्णन मिलता है। भारतीय संस्कृति में गुरु का पद सर्वोच्च इसलिए भी माना गया है क्योंकि शिष्य को अज्ञान रूपी अंधकार से बाहर निकाल कर गुरु ज्ञान रूपी प्रकाश से जोड़ता है। यही कारण है कि सारे संबंधों से गुरु-शिष्य के संबंध सबसे ऊपर माने जाते हैं। संत कबीर ने तो यहां तक कहा है कि 
नुगरा मुझको न मिले, 
पापी मिले हजार।
एक नुगरे के शीष पर, 
लख पापों का भार।

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गुरु पूर्णिमा को ‘व्यास पूर्णिमा’ भी कहते हैं। कथानक आता है कि महर्षि वशिष्ठ के पौत्र व महर्षि पराशर के पुत्र वेद व्यास बचपन से ही तप व वेद विस्तार में जुट गए थे। इसी कारण उनका नाम वेदव्यास पड़ा।  

महर्षि वेदव्यास के नाम से ही आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा  का नाम ‘व्यास पूर्णिमा अथवा गुरु पूर्णिमा पड़ा। इस विशेष दिन पर शिष्य गुरु चरणों में पहुंच कर गौरवान्वित व ऊर्जावान बनता है। शिष्य गृहस्थ आश्रम का पालन करते हुए योग की उच्च अवस्थाओं को प्राप्त करता है।

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जब सद्गुरु की मेहर की नजर, स्पर्श व प्रसाद रूप में मिल जाती है तो शिष्य अपने को धन्य महसूस करता है। यह गुरु कृपा पाने का पवित्रतम दिवस है जिन शिष्यों को इस दिन सत्गुरु चरणों में पहुंचने का अवसर मिलता है वे बहुत ही भाग्यशाली होते हैं। हम भी जीवन में गुरु तत्व को आत्मसात करें और गुरु पर्व को सार्थक करें।

कबीर के शब्दों में : 
गुरु समान दाता नहीं, 
याचक सीष समान
तीन लोक की सम्पदा
सो गुरु दीनी दान।

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