Edited By Sarita Thapa,Updated: 07 Jun, 2026 11:56 AM

गोवा का नाम आते ही मन में समुद्र तटों, रंगीन जीवनशैली और भव्य चर्चों की छवि उभरती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह भूमि एक प्राचीन और अनमोल हिन्दू धरोहर को भी संजोए हुए है।
Hidden Mahadev temple Goa : गोवा का नाम आते ही मन में समुद्र तटों, रंगीन जीवनशैली और भव्य चर्चों की छवि उभरती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह भूमि एक प्राचीन और अनमोल हिन्दू धरोहर को भी संजोए हुए है। गोवा के घने जंगलों के बीच स्थित महादेव मंदिर तांबड़ी सुरला राज्य का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है। भगवान शिव को समर्पित महादेव मंदिर तांबड़ी सुरला 12वीं-13वीं शताब्दी का है और भारतीय स्थापत्य कला की कदंब शैली का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
यह मंदिर गोवा के दक्षिण-पूर्वी भाग में भगवान महावीर अभयारण्य के भीतर स्थित है। घने वनों और प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह स्थान आध्यात्मिक शांति तथा ऐतिहासिक महत्व का अद्भुत संगम है। इसकी विशेषता यह है कि सदियों के आक्रमणों, प्राकृतिक आपदाओं और समय की मार के बावजूद यह मंदिर आज भी अपनी मूल भव्यता के साथ खड़ा है। इतिहासकारों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण कदंब शासनकाल के दौरान यादव वंश के राजा रामचंद्र द्वारा कराया गया था। मंदिर के आधार भाग पर अंकित एक शिलालेख से इसके निर्माण की जानकारी मिलती है।
यह मंदिर उन विरले स्मारकों में शामिल है जो गोवा में पुर्तगाली शासन के दौरान ध्वस्त नहीं किए गए। माना जाता है कि इसकी दुर्गम स्थिति और घने जंगलों ने इसे विनाश से बचाए रखा। आज यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है। मंदिर का निर्माण काले बेसाल्ट पत्थर से किया गया है, जो अपनी मजबूती और टिकाऊपन के लिए प्रसिद्ध है। आश्चर्य की बात यह है कि पत्थरों को बिना सीमैंट या गारे के इतनी कुशलता से जोड़ा गया है कि पूरी संरचना आज भी मजबूत बनी हुई है। मंदिर तीन प्रमुख भागों में विभाजित है- शिखर, मंडप और गर्भगृह। गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग मंदिर का मुख्य पूजनीय केंद्र है। मंदिर की स्थापत्य कला अत्यंत आकर्षक है। इसके स्तंभों, दीवारों और छतों पर की गई नक्काशी तत्कालीन शिल्पकारों की अद्भुत प्रतिभा को दर्शाती है। मंदिर में पुष्प आकृतियां, ज्यामितीय डिजाइन, पशु-पक्षियों की मूर्तियां तथा ङ्क्षहदू पौराणिक कथाओं से संबंधित दृश्य उकेरे गए हैं। रामायण, महाभारत और विष्णु के दशावतारों से जुड़े चित्रण इसकी कलात्मक महत्ता को और बढ़ाते हैं।

मंदिर के सामने नंदी की सुंदर प्रतिमा स्थापित है, जो भगवान शिव के वाहन और द्वारपाल माने जाते हैं। गर्भगृह में स्थित शिवलिंग पर चांदी का मुखौटा चढ़ाया जाता है, जिसमें शिव के पांच स्वरूपों का प्रतीकात्मक चित्रण दिखाई देता है। मंदिर के स्तंभों पर नर्तकियों, संगीतकारों, देवी-देवताओं और विभिन्न जीवों की आकर्षक आकृतियां उकेरी गई हैं, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। मंदिर केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र भी है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां भगवान शिव के दर्शन करने आते हैं। मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना, अभिषेक और आरती का आयोजन किया जाता है। शांत वातावरण और प्राकृतिक परिवेश यहां आने वाले लोगों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देते हैं।
मंदिर का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव महाशिवरात्रि है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु मंदिर में एकत्र होकर भगवान शिव की आराधना करते हैं। मंदिर को फूलों और दीपों से सजाया जाता है तथा पूरी रात भजन, कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भक्त शिवलिंग पर दूध, जल, शहद और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह मंदिर न केवल प्राचीन भारतीय वास्तुकला की श्रेष्ठता का प्रमाण है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध परंपरा को भी जीवंत बनाए हुए है।

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