Edited By Niyati Bhandari,Updated: 05 May, 2023 09:08 AM

रास्ते से एक जौहरी गुजर रहा था। उसने देखा कि कुम्हार गधे के गले में हीरा बांधकर चला जा रहा है। चकित होकर जौहरी ने
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Inspirational Context: रास्ते से एक जौहरी गुजर रहा था। उसने देखा कि कुम्हार गधे के गले में हीरा बांधकर चला जा रहा है। चकित होकर जौहरी ने कुम्हार से पूछा, ‘‘कितने पैसे लेगा इस पत्थर के?’’
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कुम्हार ने कहा, ‘‘सौ रुपया।’’ जौहरी बोला, ‘‘50 रुपए लेगा।’’ कुम्हार ने कहा, ‘‘चलो 75 रुपए सही। जौहरी का लोभ जागा, उसने सोचा-मूर्ख हीरे को पत्थर समझ रहा है। अभी लौटेगा तो 50 रुपए में दे जाएगा। किन्तु किसी दूसरे ने वह हीरा 100 रुपए में खरीद लिया।’’
जौहरी को सदमा लग गया। कुम्हार से बोला, ‘‘मूर्ख, तू कोरा गधा ही निकला। लाखों का हीरा कौड़ियों में बेच दिया।’’
कुम्हार बोला, ‘‘यदि मैं गधा न होता तो क्या हीरा गंधे के गले में बांधता, किन्तु आपको क्या कहा जाए? जब आपको पता था कि हीरा लाखों का है, फिर भी कौड़ियों के दाम चुकाने में कोताही बरतते रहे।’’

हममें से कितने ही व्यक्ति कुम्हार और जौहरी की तरह हैं। कुछ तो अनजाने में ही इस हीरे की भांति बहुमूल्य जीवन को व्यर्थ में गंवा देते हैं और सब कुछ जानते-समझते हुए भी उसे बर्बाद होते देखते रहते हैं।
