Edited By Prachi Sharma,Updated: 29 Nov, 2025 01:58 PM

Inspirational Story: लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक बचपन से अन्याय के विरोधी थे। एक बार उनकी कक्षा के कुछ छात्रों ने मूंगफली खाकर छिलके फर्श पर बिखेर दिए और चारों ओर गंदगी फैला दी। कुछ देर बाद जब उनके अध्यापक कक्षा में आए, तो कक्षा को गंदा देखकर बहुत...
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Inspirational Story: लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक बचपन से अन्याय के विरोधी थे। एक बार उनकी कक्षा के कुछ छात्रों ने मूंगफली खाकर छिलके फर्श पर बिखेर दिए और चारों ओर गंदगी फैला दी। कुछ देर बाद जब उनके अध्यापक कक्षा में आए, तो कक्षा को गंदा देखकर बहुत नाराज हो गए। अध्यापक ने पूछा तो किसी भी छात्र ने अपनी गलती नहीं मानी। इस पर अध्यापक ने सारी कक्षा को दंडित करने के लिए छड़ी निकाल ली।

उन्होंने प्रत्येक छात्र से कहा कि हाथ आगे बढ़ाओ और हथेली पर बैंत जड़ दी। जब तिलक की बारी आई तो उन्होंने अपना हाथ आगे नहीं बढ़ाया। तिलक ने अपने हाथ बगल में दबा लिए और बोले, “मैंने मूंगफली नहीं खाई है। इसलिए बैंत भी नहीं खाऊंगा।”
अध्यापक ने कहा, ‘‘तो तुम सच-सच बताओ कि मूंगफली किसने खाई है ?” “मैं किसी का नाम नहीं बताऊंगा और बैंत भी नहीं खाऊंगा,” तिलक बोले।
उनकी इस बात को सुनकर अध्यापक का गुस्सा और बढ़ गया। अध्यापक ने उनकी शिकायत प्राचार्य से कर दी। इसके बाद तिलक के घर पर उनकी शिकायत पहुंची और उनके पिताजी को स्कूल आना पड़ा।
स्कूल आकर तिलक के पिताजी ने बताया कि उनके बेटे के पास पैसे ही नहीं थे। वह मूंगफली खरीद ही नहीं सकता था। इस तरह तिलक आजीवन अन्याय का डटकर विरोध करते रहे। इसके लिए उन्हें तरह-तरह के कष्ट भी उठाने पड़े और जेल भी जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी भी अन्याय के आगे सिर नहीं झुकाया।
