Edited By Prachi Sharma,Updated: 14 Jan, 2026 02:14 PM

Inspirational Story : यूनान में ‘ओर सोलोन’ नाम के महान दार्शनिक और कवि हुए हैं। एक बार की बात है कि उनकी मुलाकात उस समय के लीबिया के राजा क्रीसस से हुई। राजा ने सोलोन के सामने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन किया।
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Inspirational Story : यूनान में ‘ओर सोलोन’ नाम के महान दार्शनिक और कवि हुए हैं। एक बार की बात है कि उनकी मुलाकात उस समय के लीबिया के राजा क्रीसस से हुई। राजा ने सोलोन के सामने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन किया।
उसने सब प्रकार के आभूषणों को सोलोन के सामने रखकर पूछा, ‘‘क्या इतनी बड़ी संपत्ति का स्वामी संसार का सबसे सुखी व्यक्ति नहीं है।’’
सोलोन ने जवाब दिया, ‘‘नहीं, इससे भी सुखी एक व्यक्ति है और मैं उसे जानता हूं। वह यूनान का एक गरीब किसान है। अमीरी और गरीबी दोनों अवस्थाओं में उसकी बहुत कम जरूरतें होती हैं और उसने उन जरूरतों को अपनी मेहनत से पूरा करना सीख लिया है।’’
सोलोन के इस उत्तर से उस राजा को प्रसन्नता नहीं हुई। वह तो एक ऐसे उत्तर की प्रतीक्षा में था, जिससे उसके अभिमान की संतुष्टि हो। इसलिए उसने फिर पूछा, ‘‘क्या सोलोन उसे सुखी नहीं समझते।’’
सोलोन ने उत्तर दिया,‘‘मृत्यृ से पहले किसको सुखी कहा जाए।’’ सोलोन का यह उत्तर बाद में सच साबित हुआ। कुछ समय बाद एक अन्य राजा ने लीबिया के साम्राज्य पर आक्रमण कर दिया, साम्राज्य ध्वस्त हो गया और क्रीसस बंदी बना लिया गया।
जब वह मृत्युदंड के लिए ले जाया जा रहा था, तब उसे सोलोन की वह बात याद आई। फांसी के तख्ते पर वह सोलोन का नाम लेकर रोने लगा। विजेता राजा ने जब यह सुना तो वह भी उसका रहस्य जानने के लिए उत्सुक हुआ। जब क्रीसस ने उसे सोलोन का वह वाक्य सुनाया, तब राजा खुद अपने भविष्य के लिए चिंतित होने लगा। उसने क्रीसस को क्षमादान दे दिया और उसे अपना मित्र बना लिया।
इस तरह से सोलोन की बात ने एक राजा की जान बचाई, और दूसरे को सुधार दिया।