इस कहानी से पढ़े, कैसे विदेश में भी कायम रही भारतीय मूल्यों की लाज

Edited By Updated: 20 Apr, 2026 01:12 PM

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बड़ौदा राज्य में ईमानदार जज शिंदे अपनी सेवाएं देते थे। बड़ौदा के तत्कालीन महाराजा के हृदय में शिंदे के प्रति गहरी श्रद्धा थी। महाराजा जब-जब विदेश जाते, अपने निजी सहायक के रूप में शिंदे को साथ ले जाते थे।

Inspirational Story : बड़ौदा राज्य में ईमानदार जज शिंदे अपनी सेवाएं देते थे। बड़ौदा के तत्कालीन महाराजा के हृदय में शिंदे के प्रति गहरी श्रद्धा थी। महाराजा जब-जब विदेश जाते, अपने निजी सहायक के रूप में शिंदे को साथ ले जाते थे। एक बार फ्रांस यात्रा के दौरान महाराजा ने शिंदे की सलाह पर पैरिस के एक बड़े जौहरी की दुकान से अत्यंत कीमती रत्न खरीदे।

अगले दिन दुकानदार का एक प्रतिनिधि शिंदे के पास आया और उसने पूछा, ‘‘सर, आपका कमिशन चैक से दिया जाए या नकद भुगतान से।’’

शिंदे प्रतिनिधि की बात सुनकर हैरानी से बोले, ‘‘किस बात का कमिशन?’’ प्रतिनिधि बोला, ‘‘सर्राफा की दुकानों में यह चलन है कि अच्छे ग्राहक लाने वाले व्यक्ति को कमिशन दिया जाता है।’’ 

शिंदे बोले, ‘‘आपके यहां जो भी परम्परा हो पर मैं सरकारी कर्मचारी हूं और यह नहीं ले सकता।’’ 

इस पर प्रतिनिधि बोला, ‘‘यह तो हमारी दुकान की परिपाटी है। मैं यह बात आपके महाराजा के समक्ष भी कह सकता हूं।’’

शिंदे बोले, ‘‘आप कमिशन काट करके अपना बिल बना दीजिए। इस कमिशन पर ग्राहक का हक होना चाहिए न कि उस व्यक्ति का, जो दुकान में ग्राहक लेकर आए।’’

शिंदे के आगे प्रतिनिधि की एक न चली।

उसने कमिशन काट कर बिल बना दिया और बोला, ‘‘सर, आपकी ईमानदारी की सूचना महाराजा तक अवश्य जानी चाहिए।’’

शिंदे बोले, ‘‘ईमानदारी मनुष्य का धर्म है, अत: इस बात का जिक्र किसी से न करें इस बात को यहीं खत्म कर दें।’’

इस पर प्रतिनिधि ने कहा, ‘‘धन्य हैं आप।’’

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
 

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