Janmashtami celebration 2026: रिमझिम बारिश के बीच जयकारों से गूंज उठी राजधानी, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब

Edited By Updated: 05 Sep, 2026 11:19 AM

janmashtami celebration 2026

रिमझिम बारिश के मध्य भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर शुक्रवार को पूरी राजधानी कृष्ण भक्ति में रंगी नजर आई। दिन ढलते ही मंदिरों में बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़ देर रात तक जयकारों में बदल गई और जैसे ही मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म का क्षण आया, दिल्ली के...

नई दिल्ली (नवोदय टाइम्स): रिमझिम बारिश के मध्य भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर शुक्रवार को पूरी राजधानी कृष्ण भक्ति में रंगी नजर आई। दिन ढलते ही मंदिरों में बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़ देर रात तक जयकारों में बदल गई और जैसे ही मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म का क्षण आया, दिल्ली के अलग-अलग मंदिर ‘हरे कृष्ण-हरे कृष्ण’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष से गूंज उठे। मंदिरों में विशेष श्रृंगार, झांकियों और भजन-कीर्तन के साथ भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े रहे। 

प्रमुख मंदिरों में जन्माष्टमी को लेकर सुबह से ही विशेष आयोजन शुरू हो गए थे। इस्कॉन मंदिर, द्वारका इस्कॉन, बिरला मंदिर, कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर, कालकाजी मंदिर, शकरपुर के कृष्ण मंदिर, श्री आद्या कात्यायनी मंदिर छतरपुर, श्री गौरी शंकर मंदिर और बद्री भगत झंडेवाला मंदिर, पंजाबी बाग़ के जापानी पार्क में श्री कृष्ण जन्मोत्सव समिति सहित विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। शोभा यात्राएं भी निकाली गई। 

आधी रात तक भक्ति में डूबी राजधानी: शाम होते-होते मंदिर परिसरों में भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों ने गति पकड़ ली। कई मंदिरों में भगवान कृष्ण की आकर्षक झांकियां सजाई गईं। कहीं बाल गोपाल को झूले में विराजमान किया गया तो कहीं वृंदावन और गोकुल की झांकी के माध्यम से कृष्ण की बाल लीलाओं को प्रदर्शित किया गया। मध्यरात्रि के करीब श्रद्धालुओं की उत्सुकता चरम पर पहुंच गई। जन्म के समय शंख और घंटियों की गूंज के बीच भगवान कृष्ण के जयकारे लगाए गए। श्रद्धालुओं ने आरती में हिस्सा लिया और बाल गोपाल के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया। कई मंदिरों में जन्म के बाद भगवान को पंचामृत स्नान और विशेष भोग अर्पित किया गया।

मटकी फोड़ से लेकर दांडिया तक उत्सव का रंग: कृष्ण जन्मोत्सव में धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिला। कई स्थानों पर ग्वाल-बाल की टोली और मटकी फोड़ कार्यक्रम आयोजित किए गए। युवाओं और बच्चों ने कृष्ण के बाल स्वरूप की वेशभूषा में कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इसी तरह कई स्थानों पर दांडिया और भक्ति संगीत के कार्यक्रमों ने माहौल को उत्सवी बना दिया। परिवारों के साथ बड़ी संख्या में युवा भी मंदिरों और आयोजन स्थलों पर पहुंचे। बच्चों में विशेष रूप से कृष्ण और राधा की वेशभूषा को लेकर उत्साह देखने को मिला।

पंजाबी बाग के जापानी पार्क में कृष्ण उत्सव: पंजाबी बाग के श्री कृष्ण जापानी पार्क में भी कृष्ण उत्सव का आयोजन किया गया। यहां धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। आयोजन स्थल पर कृष्ण भक्ति से जुड़े गीतों और कार्यक्रमों के बीच श्रद्धालुओं ने उत्सव का आनंद लिया।

सुरक्षा के बीच उमड़ी भीड़: जन्मोत्सव के कारण प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेडिंग और प्रवेश-निकास के अलग-अलग इंतजाम किए गए। मंदिर परिसरों के आसपास पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ यातायात व्यवस्था पर भी नजर रखी गई। कृष्ण जन्मोत्सव ने राजधानी को सिर्फ धार्मिक आस्था से ही नहीं, बल्कि भक्ति, संगीत, संस्कृति और सामूहिक उत्सव के रंग से भी भर दिया। 

आधी रात को कान्हा के जन्म के साथ मंदिरों में गूंजे जयकारों ने देर रात तक दिल्ली के माहौल को कृष्णमय बनाए रखा।

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