Kashi Vishwanath Mandir : महादेव की नगरी काशी विश्वनाथ धाम में पुजारियों का बढ़ा मान, 25 लाख की बड़ी राशि और रिटायरमेंट का नया फॉर्मूला लागू

Edited By Updated: 22 Feb, 2026 01:36 PM

kashi vishwanath mandir

काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने अपने पुजारियों के लिए सेवा की नई नियमावली को मंजूरी देकर एक बड़ी मिसाल पेश की है। दशकों से चली आ रही अनिश्चितताओं को खत्म करते हुए अब अर्चकों को न केवल सरकारी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि उनकी सामाजिक और...

Kashi Vishwanath Mandir : काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने अपने पुजारियों के लिए सेवा की नई नियमावली को मंजूरी देकर एक बड़ी मिसाल पेश की है। दशकों से चली आ रही अनिश्चितताओं को खत्म करते हुए अब अर्चकों को न केवल सरकारी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में भी बड़ा सुधार आएगा।

नया फॉर्मूला: सम्मानजनक विदाई और आर्थिक मजबूती
मंदिर प्रशासन द्वारा स्वीकृत नई सेवानियमावली के तहत अर्चकों के लिए 'रिटायरमेंट और फंड' का एक ऐसा ढांचा तैयार किया गया है जो पहले कभी नहीं था:

सेवानिवृत्ति : अब मंदिर के अर्चकों के लिए रिटायरमेंट की उम्र 60 साल तय कर दी गई है। इससे पहले उनके कार्यकाल और सेवा समाप्ति को लेकर कोई स्पष्ट नियम नहीं थे।

25 लाख की एकमुश्त राशि: सेवा से निवृत्त होने के समय प्रत्येक अर्चक को सम्मान निधि के रूप में 25 लाख रुपये की बड़ी राशि दी जाएगी। यह कदम उनके बुढ़ापे को सुरक्षित करने के लिए उठाया गया है।

पेंशन और बीमा: रिटायरमेंट फंड के साथ-साथ उनके लिए बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों का भी प्रावधान किया गया है।

पदोन्नति और वेतनमान में जैकपॉट
अर्चकों के मानदेय और करियर ग्रोथ को लेकर भी न्यास ने दिल खोलकर फैसले लिए हैं। अर्चकों के मानदेय को बढ़ाकर अब एक सम्मानजनक स्तर पर ले जाने का प्रस्ताव है।

प्रमोशन का तोहफा: अब अर्चकों की सेवा का मूल्यांकन होगा और उन्हें अनुभव के आधार पर Promotion भी दी जाएगी। यह पहली बार है जब मंदिर सेवा में कॉर्पोरेट और सरकारी स्तर का करियर ग्राफ तैयार किया गया है।

ग्रेड और श्रेणी: पुजारियों और सेवादारों को उनकी योग्यता और अनुभव के आधार पर चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है।

व्यवस्था में बदलाव का क्या होगा असर ?
न्यास के इन फैसलों से काशी विश्वनाथ धाम की पूजन पद्धति और प्रबंधन में क्रांतिकारी सुधार आएंगे। बेहतर सुविधाओं और मान-सम्मान के कारण अब वेद-शास्त्रों के विद्वान युवा इस सेवा की ओर अधिक आकर्षित होंगे। सेवानियमावली लागू होने से मंदिर की आंतरिक व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और हर अर्चक के अधिकार व कर्तव्य स्पष्ट होंगे। दुनिया भर के मंदिरों के लिए काशी विश्वनाथ धाम का यह 'पुजारी कल्याण मॉडल' एक प्रेरणा बनेगा।

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