महाशिवरात्रि पर काशी विश्वनाथ से महाकाल तक गूंजा हर-हर महादेव, देश के कई मंदिरों में उमड़ा सैलाब

Edited By Updated: 15 Feb, 2026 09:36 AM

mahashivratri 2026

महाशिवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर समूचा भारत शिवमय हो गया है। आज महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों सहित सभी छोटे-बड़े मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखी जा रही है।

Mahashivratri 2026 : महाशिवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर समूचा भारत शिवमय हो गया है। आज महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों सहित सभी छोटे-बड़े मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखी जा रही है। हर ओर 'हर-हर महादेव' और 'ॐ नमः शिवाय' के जयकारे गूंज रहे हैं।

उज्जैन: बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती
अवंतिका नगरी (उज्जैन) में उत्सव का नजारा सबसे अलग रहा। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पट तड़के 3 बजे ही खोल दिए गए।

भस्म आरती: भगवान महाकाल की विशेष भस्म आरती की गई, जिसमें शामिल होने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचे।

शिव नवरात्रि का समापन: महाकाल मंदिर में पिछले 9 दिनों से चल रहे 'शिव नवरात्रि' उत्सव का आज महापर्व के साथ भव्य समापन हुआ। बाबा का विशेष श्रृंगार किया गया है और मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए 44 घंटे तक निरंतर खुले रहेंगे।

काशी विश्वनाथ: भक्तों की 15 लाख से अधिक की भीड़
वाराणसी (काशी) में बाबा विश्वनाथ की नगरी पूरी तरह दुल्हन की तरह सजी हुई है।

महादर्शन: नवनिर्मित काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद यह महाशिवरात्रि बेहद खास है। अनुमान है कि आज 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालु बाबा के दरबार में मत्था टेकेंगे।

शिव बारात: शाम को काशी की गलियों में भव्य शिव बारात निकाली जाएगी, जो सांस्कृतिक और लोक रंगों से सराबोर होगी।

देश के अन्य हिस्सों में उल्लास
सोमनाथ और ओंकारेश्वर: गुजरात के सोमनाथ और मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी तड़के से ही जलाभिषेक का सिलसिला जारी है।

शिवालयों में लंबी कतारें: दिल्ली के चांदनी चौक स्थित गौरी शंकर मंदिर, झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम और देवभूमि उत्तराखंड के मंदिरों में भी कतारें कई किलोमीटर लंबी देखी जा रही हैं।

सुरक्षा व्यवस्था: भारी भीड़ को देखते हुए सभी प्रमुख मंदिरों में ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

महाशिवरात्रि का विशेष महत्व
मान्यता है कि आज ही के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। भक्त आज निर्जला या फलाहारी उपवास रखकर बेलपत्र, धतूरा, और गंगाजल से महादेव का अभिषेक कर रहे हैं।

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