Jain Community Varshitap 2026 : वर्षीतप के संकल्प 11 को, इस बार 14 महीने से अधिक चलेगी तप साधना

Edited By Updated: 07 Mar, 2026 09:05 AM

jain community varshitap 2026

जैन धर्म की तप परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले वर्षीतप के संकल्प इस वर्ष चैत्र कृष्ण अष्टमी, 11 मार्च को लिए जाएंगे। यह दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक के रूप में भी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।

लुधियाना (स.ह.): जैन धर्म की तप परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले वर्षीतप के संकल्प इस वर्ष चैत्र कृष्ण अष्टमी, 11 मार्च को लिए जाएंगे। यह दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक के रूप में भी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दौरान जैन समाज के साधु-साध्वियां तथा श्रावक-श्राविकाएं वर्षीतप का संकल्प लेकर कठिन तप साधना का आरंभ करेंगे।

जैन परंपरा में वर्षीतप को सबसे कठिन और पुण्यदायी तपों में माना जाता है। इसमें साधक एक दिन पूर्ण उपवास और दूसरे दिन आहार का क्रम लगातार लंबे समय तक निभाते हैं। तप का पारणा अगले वर्ष अक्षय तृतीया के दिन किया जाता है। धार्मिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में अधिकमास पड़ने के कारण इस बार वर्षीतप की अवधि सामान्य वर्षों की तुलना में अधिक, लगभग 14 महीनों से भी अधिक रहने की संभावना है।

इस तप के दौरान साधक लगभग 23 प्रकार के खाद्य पदार्थों का त्याग करते हैं, जिनमें बासी भोजन, जमीकंद, बहुबीज वाले पदार्थ और अधिक मसालेदार भोजन शामिल हैं। इसके साथ ही रात्रि में जल ग्रहण न करना, प्रतिदिन प्रतिक्रमण, गुरुवंदन, स्वाध्याय और ध्यान जैसे धार्मिक नियमों का भी पालन किया जाता है। जैन परंपरा के अनुसार दीक्षा के बाद भगवान आदिनाथ को 13 माह तक पारणा नहीं मिला था। बाद में हस्तिनापुर में राजा श्रेयांस कुमार ने उन्हें गन्ने का रस अर्पित कर पारणा कराया। इसी घटना की स्मृति में आज भी वर्षीतप का पारणा अक्षय तृतीया के दिन इक्षुरस से किया जाता है।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!