Main Door Vastu : दक्षिणमुखी दरवाजा भी होता है शुभ ! बस अपनाने होंगे ये खास वास्तु टिप्स

Edited By Updated: 28 Mar, 2026 01:11 PM

main door vastu

Main Door Vastu : वास्तु शास्त्र में दिशाओं का अपना महत्व है और अक्सर दक्षिण दिशा को लेकर लोगों के मन में एक अनजाना डर या नकारात्मक धारणा बनी रहती है। कई लोग मानते हैं कि दक्षिणमुखी घर या दरवाजा केवल परेशानियां और दरिद्रता लाता है। लेकिन वास्तु...

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Main Door Vastu : वास्तु शास्त्र में दिशाओं का अपना महत्व है और अक्सर दक्षिण दिशा को लेकर लोगों के मन में एक अनजाना डर या नकारात्मक धारणा बनी रहती है। कई लोग मानते हैं कि दक्षिणमुखी घर या दरवाजा केवल परेशानियां और दरिद्रता लाता है। लेकिन वास्तु विज्ञान के अनुसार, यह पूरी तरह सच नहीं है। अगर सही नियमों और गणितीय गणनाओं का पालन किया जाए, तो दक्षिणमुखी दरवाजा न केवल शुभ हो सकता है, बल्कि यह आपको अपार धन, प्रसिद्धि और सफलता भी दिला सकता है। प्रसिद्ध हस्तियों और सफल व्यवसायियों के कई घर दक्षिणमुखी ही होते हैं।

 मुख्य द्वार की सही स्थिति 
दक्षिण दिशा में दरवाजा होना बुरा नहीं है लेकिन उसका पद गलत होना समस्या पैदा करता है। वास्तु शास्त्र में एक दिशा को 9 भागों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें पद कहते हैं। दक्षिण दिशा के नौ भागों में से चौथा पद सबसे शुभ माना जाता है। यदि आपका मुख्य द्वार यहां है तो यह सुख-समृद्धि लाता है। यदि चौथे पद पर संभव न हो, तो तीसरे और दूसरे पद का भी उपयोग किया जा सकता है।

र्जित: दक्षिण-पश्चिम कोने या बिल्कुल दक्षिण-पूर्व के कोने में दरवाजा बनाने से बचना चाहिए। दक्षिण-पश्चिम का दरवाजा राहु का प्रभाव बढ़ाता है, जो मानसिक तनाव और आर्थिक हानि दे सकता है।

 पंचतत्वों का संतुलन: रंग और सामग्री
दक्षिण दिशा का स्वामी मंगल है और इसका तत्व अग्नि है। इसलिए मुख्य द्वार के रंगों का चयन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए:

क्या चुनें: मुख्य द्वार के लिए लाल, नारंगी, भूरा या लकड़ी के प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करें। ये रंग मंगल की ऊर्जा के साथ तालमेल बिठाते हैं।

क्या न चुनें: दक्षिणमुखी द्वार पर नीले या काले रंग का प्रयोग भूलकर भी न करें। नीला रंग जल का प्रतीक है, और अग्नि-जल का मेल वास्तु दोष उत्पन्न करता है।

मुख्य द्वार की बनावट और सजावट
दक्षिणमुखी दरवाजे को दोषमुक्त और ऊर्जावान बनाने के लिए उसकी बनावट पर ध्यान दें:

दरवाजे का आकार: घर के अन्य सभी दरवाजों की तुलना में मुख्य द्वार थोड़ा बड़ा, मजबूत और आकर्षक होना चाहिए।

दहलीज: दक्षिणमुखी घर में लकड़ी या संगमरमर की दहलीज जरूर बनवाएं। यह नकारात्मक ऊर्जा को घर के अंदर प्रवेश करने से रोकती है।

मंगल चिह्न: दरवाजे पर ॐ, स्वास्तिक या त्रिशूल का चिह्न लगाएं। इसके अलावा, द्वार के ऊपर भगवान गणेश की प्रतिमा (सिंदूरी रंग की) लगाना अत्यंत शुभ होता है, लेकिन ध्यान रहे कि गणेश जी की पीठ घर के बाहर की ओर न हो।

दक्षिणमुखी द्वार के लिए अचूक वास्तु उपाय

नकारात्मक ऊर्जा को रोकने के उपाय
नुमान जी की कृपा: मुख्य द्वार के ठीक ऊपर बाहर की तरफ पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर या प्रतिमा लगाएं। हनुमान जी को दक्षिण दिशा का रक्षक माना जाता है।

पिरामिड का उपयोग: दरवाजे के ऊपर तीन वास्तु पिरामिड लगाने से उस दिशा के दोष काफी हद तक कम हो जाते हैं।

दर्पण का प्रयोग: मुख्य द्वार के सामने पाकुआ दर्पण लगाया जा सकता है, जो नकारात्मक ऊर्जा को वापस परावर्तित कर देता है।

पौधों का चयन
दक्षिण दिशा की नकारात्मकता को दूर करने के लिए प्रवेश द्वार के पास नीम का पेड़ लगाना बहुत लाभकारी होता है। यदि जगह कम है, तो आप गमलों में लाल फूलों वाले पौधे लगा सकते हैं।

घर के अंदर का आंतरिक वास्तु 
सिर्फ दरवाजा ही नहीं, बल्कि घर के अंदर की व्यवस्था भी दक्षिणमुखी घर के प्रभाव को बदल सकती है। घर का दक्षिण और पश्चिम हिस्सा हमेशा उत्तर और पूर्व से भारी और ऊंचा होना चाहिए। दक्षिणमुखी घर में मुख्य शयनकक्ष हमेशा दक्षिण-पश्चिम में होना चाहिए। अग्नि तत्व की दिशा होने के कारण, दक्षिण-पूर्व रसोई के लिए सबसे अच्छी जगह है।  घर के उत्तर और पूर्व दिशा में खिड़कियां और बालकनी अधिक रखें ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे।

दक्षिणमुखी घर के लाभ
ऐसे घर में रहने वाले लोग अक्सर साहसी होते हैं और अपने करियर में तेजी से उन्नति करते हैं। दक्षिण दिशा यश और कीर्ति की दिशा है। सही वास्तु वाले घर के निवासियों को समाज में बहुत मान-सम्मान मिलता है। मंगल की ऊर्जा के कारण यहां रहने वाले लोग शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक सक्रिय रहते हैं।
 

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