Edited By Niyati Bhandari,Updated: 13 Jun, 2026 03:05 PM
Somvati Amavasya 2026: मिथुन संक्रांति 2026 पर सूर्य देव का मिथुन राशि में प्रवेश और सोमवती अमावस्या का संयोग। जानें कुंडली में सूर्य को मजबूत करने के उपाय और दान का महत्व।
Mithun Sankranti Somvati Amavasya 2026: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा सूर्य देव का राशि परिवर्तन एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। साल 2026 में 15 जून को सूर्य देव वृषभ राशि से निकलकर अपने मित्र बुध की राशि मिथुन में प्रवेश करेंगे, जिसे 'मिथुन संक्रांति' के रूप में मनाया जाएगा। इस बार की संक्रांति इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन सोमवती अमावस्या का पावन संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन किए गए स्नान-दान का फल कई गुना बढ़ जाएगा।
सूर्य की मजबूती से मिलेगा आरोग्य का आशीर्वाद
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस जातक की कुंडली में सूर्य मजबूत होता है, उसे समाज में मान-सम्मान, उत्तम स्वास्थ्य और करियर में नई ऊंचाइयां प्राप्त होती हैं। मिथुन संक्रांति के दिन सूर्य देव की विशेष पूजा-अर्चना करने से आरोग्यता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 15 जून 2026 को होने वाला यह राशि परिवर्तन न केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत है, बल्कि यह आध्यात्मिक शुद्धि का भी अवसर है। इस दिन किए गए उपायों से जीवन में सकारात्मकता और सफलता के द्वार खुलते हैं।

मिथुन संक्रांति और सोमवती अमावस्या के अचूक उपाय
एक तांबे का सिक्का अपने गले में धारण करें। व्यापार में दुगुनी सफलता प्राप्त होगी। धन की आवक ठीक रहेगी।
घर के मुख्य द्वार पर एक तांबे का गोल छेद वाला सिक्का सफेद धागे में पिरोकर लटका दें। सरकारी कामों में चल रही परेशानी दूर होगी। न्यायिक कामों में सफ़लता मिलेगी।
स्टॉक और फाइनेंस से जुड़े मामलों में लाभ के लिए ये समय बहुत उपयुक्त है। रोजाना फिटकरी से दांत साफ करें। किसी किन्नर को गेहूं की रोटी और गुड़ दान करें। ज़बरदस्त लाभ मिलेंगे।
अपने सोए भाग को जगाने का इससे अच्छा अवसर नहीं मिलेगा। संक्रांति की शुरुआत से संक्रांति की समाप्ति तक अपने पिता के पांव हाथ लगाएं और बहन या बेटी को रोज़ एक रुपए का सिक्का दें। आपकी किस्मत खुल जाएगी।
शुभ-लाभ के लिए घर की पूर्व दिशा में सूर्यदेव के साथ सात घोड़ों की तस्वीर लगाएं। किचन में तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने से अन्न की देवी मां अन्नपूर्णा भंडार में कोई कमी नहीं आने देती। बच्चों के स्टडी रूम में सूर्यदेव की प्रतिमा लगाने से उनकी बुद्धि कुशाग्र होती है और एकाग्रता बनी रहती है।
पानी में तिल मिलाकर शिवलिंग पर अभिषेक करें।
भगवान विष्णु के मंदिर में नीले फूल चढ़ाएं।
शिवलिंग पर शहद से अभिषेक करें।
माता गौरी के चित्र पर सिंदूर चढ़ाएं।
पीपल की 108 परिक्रमा करें।
शालीग्राम जी पर तुलसी की मंजरी चढ़ाएं।
शिवलिंग पर पंचामृत से अभिषेक करें।
भगवान विष्णु के मंदिर में लाल फूल चढ़ाएं।
गणेश जी पर दही-चावल चढ़ाएं।
भगवान शंकर पर चावल की खीर चढ़ाएं।
गाय को गुड़ खिलाएं।
पीपल पर जल चढ़ाकर सात परिक्रमा करें, शनि, राहू और केतू से मिलने वाला अशुभ प्रभाव नष्ट होगा।
