Edited By Niyati Bhandari,Updated: 08 Apr, 2026 08:58 AM

भाग्य है तो सब कुछ है
कुंती पांडवों के साथ वनवास पर थीं। वन की कुछ महिलाओं ने कहा, ‘‘हमें कुछ सीख दीजिए।’’
कुंती ने कहा, ‘‘देखो तुम स्त्री हो, पुत्रों को
भाग्य है तो सब कुछ है
कुंती पांडवों के साथ वनवास पर थीं। वन की कुछ महिलाओं ने कहा, ‘‘हमें कुछ सीख दीजिए।’’
कुंती ने कहा, ‘‘देखो तुम स्त्री हो, पुत्रों को जन्म दोगी लेकिन भाग्यवान पुत्र को जन्म देना।’’
महिलाओं ने कहा, ‘‘मतलब?’’
कुंती बोलीं, ‘‘इन मेरे पुत्रों को देखो। ये शूरवीर हैं, धुरंधर हैं, पराक्रमी हैं, फिर भी जंगल में ठोकरें खा रहे हैं क्योंकि ये भाग्यवान नहीं हैं। मेरी एक सीख है- तुम भाग्यवान पुत्रों को जन्म देना। भाग्य है तो सब कुछ है। भाग्य नहीं तो बुद्धि, पुरुषार्थ, पराक्रम सब कुछ व्यर्थ है।’’

अनुराग में गाया करो
मीरा भक्ति में मगन थी, भजन गा रही थी। सभा में कोई संगीतज्ञ बैठा रहा होगा। संगीतज्ञ के हिसाब से भजन में, लय-ताल में तालमेल नहीं बैठ रहा होगा। सो उसने सामने दीवार पर लिख दिया- राग में गाया करो। मीरा की समाधि टूटी। भजन पूरा हुआ। सामने लिखा हुआ पढ़ा तो मीरा ने उसमें एक शब्द जोड़ दिया-अनुराग में गाया करो। राग में गाने से जगत प्रसन्न होता है। अनुराग में गाने से जगदीश प्रसन्न होते हैं। अब क्या करना है? निर्णय तुम्हें करना है।

मन से माया निकाल दो
कपड़ा नापना है तो मीटर चाहिए। दूध नापना है तो लीटर चाहिए। बुखार नापना है तो थर्मामीटर चाहिए और मन को नापना है तो ईश्वर चाहिए। मन अनंत है, उसे सिवाय ईश्वर के कोई नहीं नाप सकता। मन को नापना मेंढक को तराजू पर तोलने जैसा है। तराजू पर दो मेंढक रखोगे, चार उछल जाएंगे। सबका अपना-अपना काम है। मीटर का काम लीटर और लीटर का काम थर्मामीटर नहीं कर सकता। धूल में शक्कर मिल गई तो चींटी ही शक्कर को अलग करके खा सकती है। यह कार्य हाथी नहीं कर सकता। मन से माया निकाल दो, संसार खत्म हो जाएगा।
