Edited By Tanuja,Updated: 23 May, 2026 09:01 PM

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से व्हाइट हाउस आने का न्योता दिया। नई दिल्ली में हुई बैठक में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, QUAD सहयोग और पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा हुई। दोनों देशों...
International Desk: अमेरिका और भारत के रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कूटनीतिक कदम सामने आया है। मार्को रूबियो (Marco Rubio) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया है। अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को निकट भविष्य में व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया गया है। मार्को रूबियो शनिवार को भारत पहुंचे और उन्होंने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की।
यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें रक्षा, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक तकनीक, निवेश और लोगों के बीच संबंधों जैसे कई बड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।बैठक में रूबियो ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर अमेरिका का पक्ष भी भारत के सामने रखा। इसके जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हमेशा बातचीत और कूटनीति के जरिए शांति कायम करने का समर्थन करता है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया। चर्चा में रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, कनेक्टिविटी, शिक्षा और QUAD सहयोग जैसे मुद्दे शामिल रहे।
बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar), राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल (Ajit Doval), अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और अमेरिकी अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। दिल्ली पहुंचने से पहले रूबियो ने कोलकाता में Mother Teresa के मिशनरीज ऑफ चैरिटी मुख्यालय का दौरा किया और श्रद्धांजलि दी। उन्होंने मदर टेरेसा की सेवा और करुणा की विरासत की सराहना की। मार्को रूबियो की यह चार दिवसीय भारत यात्रा 23 से 26 मई तक चलेगी। इस दौरान वह दिल्ली के अलावा आगरा और जयपुर भी जाएंगे। उनकी यात्रा को भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने के रूप में देखा जा रहा है।यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और अमेरिका QUAD सहयोग, रक्षा साझेदारी, ऊर्जा सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर तेजी से साथ काम कर रहे हैं।