Navratri Vastu Tips : नवरात्रि के 9 दिनों में घर के दरवाजे पर रखें ये 3 चीजें, दूर होंगी सभी बाधाएं

Edited By Updated: 10 Mar, 2026 12:01 PM

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Navratri Vastu Tips : हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में नवरात्रि के नौ दिनों को बेहद ऊर्जावान माना गया है। यह वह समय होता है जब ब्रह्मांडीय शक्तियां पृथ्वी के सबसे करीब होती हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमारे घर का मुख्य द्वार केवल आने-जाने का...

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Navratri Vastu Tips : हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में नवरात्रि के नौ दिनों को बेहद ऊर्जावान माना गया है। यह वह समय होता है जब ब्रह्मांडीय शक्तियां पृथ्वी के सबसे करीब होती हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमारे घर का मुख्य द्वार केवल आने-जाने का रास्ता नहीं है बल्कि यह सिंह द्वार है जहां से देवी लक्ष्मी और सुख-समृद्धि का प्रवेश होता है। यदि आपके जीवन में लगातार बाधाएं आ रही हैं, तरक्की रुकी हुई है या घर में मानसिक तनाव रहता है, तो नवरात्रि के दौरान मुख्य द्वार पर ये 3 चीजें रखने से आप चमत्कारिक बदलाव देख सकते हैं।

आम और अशोक के पत्तों का वंदनवार
वास्तु में मुख्य द्वार पर वंदनवार सजाना अनिवार्य माना गया है, विशेषकर त्यौहारों के समय। नवरात्रि के पहले दिन अपने घर के पुराने वंदनवार को हटाकर ताजे पत्तों का वंदनवार लगाएं। आम के पत्तों में नकारात्मक ऊर्जा को सोखने की अद्भुत क्षमता होती है। अशोक के पत्ते घर से शोक और दुख को दूर करने वाले माने जाते हैं। इन्हें लाल कलावे या सूती धागे में पिरोकर इस तरह लगाएं कि पत्तों का स्पर्श मुख्य द्वार से होकर गुजरने वाले हर व्यक्ति को  प्राप्त हो। यदि आप पत्तों के बीच में गेंदे के फूल लगाते हैं, तो यह गुरु ग्रह को मजबूत करता है, जिससे घर में मांगलिक कार्य की बाधाएं दूर होती हैं।

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सिंदूर का स्वास्तिक और शुभ-लाभ
मुख्य द्वार की चौखट को वास्तु में देहरी कहा जाता है। नवरात्रि के पावन अवसर पर अपनी देहरी का पूजन करना और वहां शुभ चिन्ह बनाना दरिद्रता को घर में घुसने से रोकता है। बाजार से मिलने वाले प्लास्टिक के स्वास्तिक के बजाय, अपने हाथ से शुद्ध केसर या सिंदूर और चमेली के तेल के मिश्रण से स्वास्तिक बनाएं। स्वास्तिक की चारों भुजाएं बराबर होनी चाहिए और उसके बीच में चार बिंदियां जरूर लगाएं, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का प्रतीक हैं।  स्वास्तिक के साथ-साथ द्वार के दोनों ओर शुभ और लाभ लिखें। यह न केवल धन आगमन के मार्ग खोलता है, बल्कि व्यापार या नौकरी में आ रही रुकावटों को भी समाप्त करता है। लाल रंग मंगल का प्रतीक है, जो साहस और ऊर्जा प्रदान करता है।

जल से भरा कलश या पीतल का पात्र
जल तत्व को वास्तु में शांति और प्रचुरता का कारक माना गया है। नवरात्रि के दौरान मुख्य द्वार के पास जल का एक छोटा स्थान बनाना माता दुर्गा के स्वागत का एक प्राचीन तरीका है। एक पीतल या मिट्टी के चौड़े पात्र (जिसे उरुली भी कहा जाता है) में साफ पानी भरें। इसमें ताजे गुलाब या गेंदे के फूल डालें। साथ ही, इसमें एक कपूर की टिकिया और थोड़ा सा इत्र छिड़क दें। इसे मुख्य द्वार के दाईं ओर (घर से बाहर निकलते समय) रखें। जल का यह पात्र घर में आने वाली किसी भी नकारात्मक दृष्टि या 'बुरी नजर' को अपनी ओर खींच लेता है, जिससे घर के सदस्य सुरक्षित रहते हैं। ध्यान रहे कि इस जल को प्रतिदिन बदलें और बासी फूलों को किसी गमले में डाल दें।

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इन 3 चीजों के अलावा, नवरात्रि के दौरान कुछ छोटी बातों का ध्यान रखना आपकी पूजा के फल को दोगुना कर सकता है:

द्वार की स्वच्छता: मुख्य द्वार के पास जूते-चप्पल का ढेर या कचरा दान कभी न रखें। यह राहु के दोष को बढ़ाता है जिससे अचानक दुर्घटनाएं या नुकसान होते हैं।

प्रकाश की व्यवस्था: शाम के समय मुख्य द्वार पर एक घी का दीपक या कम से कम एक बल्ब जरूर जलाएं। अंधेरा घर में नकारात्मक शक्तियों को आमंत्रित करता है।

कपूर का धुआं: सुबह और शाम की आरती के बाद कपूर का धुआं पूरे घर में और विशेषकर मुख्य द्वार पर जरूर दिखाएं। यह वातावरण को जीवाणु मुक्त और ऊर्जावान बनाता है।

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