Edited By Prachi Sharma,Updated: 06 Mar, 2026 01:39 PM

Vastu Tips For Couples : दांपत्य जीवन में सुख, शांति और प्रेम बनाए रखने के लिए भारतीय संस्कृति में अनेक मान्यताएं और परंपराएं प्रचलित हैं। यद्यपि आधुनिक मनोविज्ञान इसे व्यक्तिगत सुविधा का विषय मानता है परंतु वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के दृष्टिकोण से...
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Vastu Tips For Couples : दांपत्य जीवन में सुख, शांति और प्रेम बनाए रखने के लिए भारतीय संस्कृति में अनेक मान्यताएं और परंपराएं प्रचलित हैं। यद्यपि आधुनिक मनोविज्ञान इसे व्यक्तिगत सुविधा का विषय मानता है परंतु वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के दृष्टिकोण से सोने की दिशा और स्थान का दंपत्ति के संबंधों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अक्सर यह प्रश्न पूछा जाता है कि रात को सोते समय पति के किस ओर पत्नी को सोना चाहिए ताकि उनके बीच प्रेम और सामंजस्य बना रहे। आइए, इस विषय को शास्त्र सम्मत और व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझते हैं।
पति के वाम अंग का महत्व
भारतीय पौराणिक कथाओं और शास्त्रों में पत्नी को पति का 'वामांगी' कहा गया है। 'वामांगी' का शाब्दिक अर्थ है वह जिसका स्थान पति के वाम भाग में हो। भगवान शिव को अर्धनारीश्वर कहा जाता है, जिसमें माता पार्वती का स्थान भगवान शिव के बाईं ओर स्थित है। इसी प्रकार, विवाह संस्कार के समय भी फेरों के दौरान पत्नी पति के बाईं ओर बैठती है।
बायां भाग हृदय के करीब माना जाता है। पति के बाईं ओर सोने का अर्थ है कि पत्नी उनके हृदय के सबसे निकट है और वह पति के जीवन के हर भावनात्मक निर्णय में सहभागी है। ऐसा माना जाता है कि पत्नी के बाईं ओर होने से दांपत्य जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आपसी समझ बेहतर होती है।

वास्तु शास्त्र और सोने की दिशा
सोने की दिशा का प्रभाव केवल पति-पत्नी के संबंधों पर ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और मानसिक शांति पर भी पड़ता है। वास्तु के अनुसार:
सोते समय सिर दक्षिण दिशा में रखना सबसे उत्तम माना जाता है। इससे गहरी नींद आती है और स्वास्थ्य ठीक रहता है। यदि आप दक्षिण की ओर सिर करके सो रहे हैं, तो पति को दाईं ओर और पत्नी को बाईं ओर सोना चाहिए।
पूर्व दिशा की ओर सिर करके सोना भी शुभ माना जाता है क्योंकि यह दिशा ज्ञान और ऊर्जा का प्रतीक है।
उत्तर दिशा की ओर सिर करके सोने से बचना चाहिए, क्योंकि यह दिशा स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती।