Edited By Lata,Updated: 04 Nov, 2019 12:23 PM

कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी का पर्व मनाया जाता है और इस साल
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कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी का पर्व मनाया जाता है और इस साल ये 08 नवंबर दिन शुक्रवार को पड़ रहा है। कहते हैं कि इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा जाग जाते हैं। बता दें कि भगवान चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं, जिसे चातुर्मास के नाम से जाना जाता है। इस दौरान सभी तरह के धार्मिक कामों पर विराम लग जाता है और अब जब भगवान जाग जाएंगे तो हर तरह के मांगलिक काम होने लगेगें। इसके साथ ही आज हम आपको कार्तिक में किए जाने वाले पंचभीका व्रत के बारे में बताने जा रहे हैं।

कार्तिक पंच तीर्थ महास्नान भी इसी दिन से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है। पूरे महीने कार्तिक स्नान करने वालों के लिए एकादशी तिथि से 'पंचभीका व्रत' का प्रारम्भ होता है, जो पांच दिन तक निराहार (निर्जला) रहकर किया जाता है। यह धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति के लिए किया जाता है। पदम पुराण में वर्णित एकादशी महात्यम के अनुसार देवोत्थान एकादशी व्रत का फल एक हज़ार अश्वमेघ यज्ञ और सौ राजसूय यज्ञ के बराबर होता है। एकादशी तिथि का उपवास बुद्धिमान, शांति प्रदाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान व भगवान विष्णु के पूजन का विशेष महत्त्व है। इस व्रत को करने से जन्म-जन्मांतर के पाप क्षीण हो जाते हैं तथा जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।

देवउठनी एकादशी की पूजा-विधि
इस दिन सांयकाल में पूजा स्थल को साफ़-सुथरा कर लें, चूना व गेरू से श्री हरि के जागरण के स्वागत में रंगोली बनाएं।
घी के ग्यारह दीपक देवताओं के निमित्त जलाएं।
द्राक्ष, ईख, अनार, केला, सिंघाड़ा, लड्डू, पतासे, मूली आदि ऋतुफल एवं नवीन धान्य इत्यादि पूजा सामग्री के साथ रखें। यह सब श्रद्धापूर्वक श्री हरि को अर्पण करने से उनकी कृपा सदैव बनी रहती है।

इस दिन मंत्रोच्चारण,स्त्रोत पाठ,शंख घंटा ध्वनि एवं भजन-कीर्तन द्वारा देवों को जगाने का विधान है।