Edited By Sarita Thapa,Updated: 22 May, 2026 03:50 PM

आज कल की चकाचौंध भरी जिंदगी में लोग अपने आपको दूसरों के सामने कुल दिखाने के चक्कर में फास्ट फूड, लाइफस्टाइल और मॉडर्न सोच को तरक्की का पैमाना मानते हैं।
Premanand Ji Maharaj : आज कल की चकाचौंध भरी जिंदगी में लोग अपने आपको दूसरों के सामने कुल दिखाने के चक्कर में फास्ट फूड, लाइफस्टाइल और मॉडर्न सोच को तरक्की का पैमाना मानते हैं। अक्सर कुछ लोगों के मन में यह सवाल आता है यदि शाकाहार को आध्यात्मिक और सात्विक जीवन लिए श्रेष्ठ माना जाता है, तो फिर भी क्यों मांसाहार का सेवन करने के बाद भी विदेशी लोग भारतीय लोगों से ज्यादा हर क्षेत्र में तरक्की और सफलता प्राप्त करते हैं। वहीं कुछ संतों की बातें लोगों को अपने पिछले जड़ों को देखने के लिए मजबीर कर रही है। इसी विषय में एक भक्त ने प्रेमानंद जी महाराज से सवाल किया, जिनका बहुत सरल और गहरा प्रेमांनंद जी महाराज का उत्तर बहुत तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। तो आइए क्या इस बारे में क्या कहा प्रमानंद जी महाराज ने इस बारे में-
मांसाहार करने वालों को भुगतना पड़ता है दंड
प्रेमानंद जी महाराज ने साफ चेतावनी दी है कि जो लोग बेजुबान जानवरों को काटकर खाते हैं और तर्क देते हैं कि हम तो सिर्फ खरीदते हैं, काटते नहीं, वे भी उतने ही बड़े पापी हैं। मांस को काटने वाला, उसे बेचने वाला, पकाने वाला और खाने वाला ये सब उस जीव की हत्या के बराबर के भागीदार होते हैं। महाराज जी कहते हैं कि भले ही आज किसी को अपनी गलती का अहसास न हो और वह पैसे के घमंड में जी रहा हो, लेकिन जब प्रकृति और समय अपना न्याय चक्र चलाएगा, तो इसका भयानक दंड भुगतना ही पड़ेगा।

विदेशी लोगों की सफलता पर क्या बोले प्रेमानंद जी महाराज
प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि किसी व्यक्ति या समाज की तरक्की और सफलता के पीछे उनके खाने पीने की आदत पर निर्भर नहीं करता है। उन्होंने कहा कि सफलता के पीछे मेहनत, अनुशासन, समय का सही उपयोग, ईमानदारी, शिक्षा और कर्मठता जैसे कई महत्वपूर्ण कारण होते हैं। अगर कोई व्यक्ति अपने काम के लिए पूरी तरह से समर्पित रहते हैं और मन लगाकर पूरी श्रद्धा से मेहनत करते हैं, तो उसे उसके कर्मों का फल अवश्य मिलता है। प्रेमानंद जी महाराज का कहना है कि मनुष्य को दूसरों से तुलना करने के बजाय अपने जीवन को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए। यदि व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन करता है, अच्छे संस्कारों को अपनाता है और सकारात्मक सोच रखता है, तो वह हर क्षेत्र में प्रगति कर सकता है।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ