Edited By Sarita Thapa,Updated: 27 Feb, 2026 04:03 PM

होली का त्योहार खुशियों और रंगों का प्रतीक है, लेकिन साल 2026 में होली के पावन अवसर पर चंद्र ग्रहण का साया पड़ने जा रहा है।
Premanand Maharaj Chandra Grahan 2026 : होली का त्योहार खुशियों और रंगों का प्रतीक है, लेकिन साल 2026 में होली के पावन अवसर पर चंद्र ग्रहण का साया पड़ने जा रहा है। ग्रहण के नाम से अक्सर लोग डर जाते हैं, लेकिन वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज का कहना है कि भक्त के लिए कोई भी समय अशुभ नहीं होता, बशर्ते वह सही मार्ग पर चले। सूतक काल की चिंताओं के बीच, महाराज जी ने कुछ ऐसे सरल और दिव्य उपाय बताए हैं, जिन्हें अपनाकर आप ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव को शुभ फल में बदल सकते हैं।
ग्रहण और सूतक काल
महाराज जी के अनुसार, ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक प्रगति का एक बड़ा अवसर है। ग्रहण शुरू होने से पहले लगने वाले सूतक काल में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे बचने के लिए संयम और नियम जरूरी हैं।
प्रेमानंद महाराज के बताए अचूक उपाय
नाम-जप ही सबसे बड़ी ढाल है
प्रेमानंद महाराज हमेशा जोर देते हैं कि राधे-राधे या अपने इष्ट देव का नाम जपना हर संकट का समाधान है। महाराज जी कहते हैं कि ग्रहण के समय किया गया एक माला जप, सामान्य दिनों के हजार माला जप के बराबर फल देता है। इसलिए इस दौरान इधर-उधर की बातों के बजाय मौन रहकर निरंतर जप करें।

भोजन और जल की शुद्धता
सूतक काल शुरू होने से पहले ही घर में रखे दूध, दही और पीने के पानी में कुशा (घास) या तुलसी के पत्ते डाल दें। महाराज जी के अनुसार, इससे ग्रहण की हानिकारक किरणें भोजन को दूषित नहीं कर पातीं।
ग्रहण काल में क्या न करें?
सोने से बचें: महाराज जी सलाह देते हैं कि ग्रहण के दौरान सोना नहीं चाहिए। इस समय को जागकर प्रभु भक्ति में लगाना चाहिए।
भोजन का त्याग: बहुत बीमार या वृद्धों को छोड़कर, अन्य लोगों को ग्रहण काल में भोजन करने से बचना चाहिए।
दान और स्नान का महत्व
जैसे ही ग्रहण समाप्त हो, महाराज जी स्नान करने और उसके बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार सफेद वस्तुओं का दान करने की सलाह देते हैं। यह दान ग्रहण के बाद होने वाली मानसिक शांति के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है।

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