Edited By Sarita Thapa,Updated: 20 Feb, 2026 10:46 AM

वृंदावन की गलियों में रंगों का उत्सव परवान चढ़ने लगा है और इसकी सबसे जीवंत तस्वीर श्रीराधावल्लभ मंदिर से सामने आई है। फाल्गुन महीने की शुरुआत के साथ ही यहां होली का आधिकारिक आगाज हो चुका है, जहां ठाकुरजी ने स्वयं अपने भक्तों के साथ गुलाल खेलकर प्रेम...
Radha Vallabh Temple Holi : वृंदावन की गलियों में रंगों का उत्सव परवान चढ़ने लगा है और इसकी सबसे जीवंत तस्वीर श्रीराधावल्लभ मंदिर से सामने आई है। फाल्गुन महीने की शुरुआत के साथ ही यहां होली का आधिकारिक आगाज हो चुका है, जहां ठाकुरजी ने स्वयं अपने भक्तों के साथ गुलाल खेलकर प्रेम के रंगों की वर्षा की।
फुलेरा दूज से हुई गुलाल की शुरुआत
ब्रज में वसंत पंचमी से ही होली का माहौल बन जाता है, लेकिन 19 फरवरी फुलेरा दूज से श्रीराधावल्लभ मंदिर में गुलाल की होली का विशेष रूप देखने को मिला। मान्यता है कि इसी दिन से ठाकुरजी अपने कमर में गुलाल की पोटली बांधकर होली खेलने के लिए तैयार होते हैं।
ठाकुरजी का दिव्य श्रृंगार
होली के इस विशेष अवसर पर राधावल्लभ लाल का श्रृंगार बेहद मनमोहक होता है। ठाकुरजी को विशेष रूप से सफेद मलमल के वस्त्र धारण कराया गया, ताकि उन पर गुलाल के रंग स्पष्ट और सुंदर दिखें। मंदिर के सेवायतों ने सबसे पहले ठाकुरजी के गालों पर गुलाल लगाकर उन्हें होली का निमंत्रण दिया। इसके बाद वही गुलाल भक्तों पर प्रसाद के रूप में बरसाया गया। जिसे पाकर श्रद्धालु खुद को धन्य मानते हैं।
राधे-राधे की गूंज और गुलाल के बादल
मंदिर परिसर में सुबह से ही होली के पद शुरू हो जाते हैं। जैसे ही सेवायत गुलाल उड़ाते हैं, पूरा मंदिर परिसर रंगीन बादलों में घिर जाता है। देश-विदेश से आए श्रद्धालु भक्ति और मस्ती में डूबकर झूमने लगते हैं।
श्रीराधावल्लभ मंदिर की अनोखी परंपरा
इस मंदिर में होली केवल रंगों का खेल नहीं है, बल्कि यह राधा और कृष्ण के रास का एक हिस्सा है। यहां की होली में चांदी की पिचकारियों का उपयोग किया जाता है और एकादशी के बाद से केसरिया रंग के पानी की बौछारें भक्तों को सराबोर कर देती हैं।
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