Edited By Prachi Sharma,Updated: 14 Feb, 2026 09:54 AM

Ujjain Mahakal Maha Shivratri 2026 : मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन इन दिनों महाशिवरात्रि की तैयारियों में डूबी हुई है। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह उत्सव की तैयारियां पूरे उत्साह के साथ की जा रही हैं।...
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Ujjain Mahakal Maha Shivratri 2026 : मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन इन दिनों महाशिवरात्रि की तैयारियों में डूबी हुई है। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह उत्सव की तैयारियां पूरे उत्साह के साथ की जा रही हैं। श्रद्धालुओं की निगाहें उस क्षण पर टिकी हैं जब शनिवार और रविवार की दरमियानी रात 2:30 बजे मंदिर के द्वार खुलेंगे और भक्तों को त्रिलोकीनाथ बाबा महाकाल के अलौकिक स्वरूप के दर्शन प्राप्त होंगे।
44 घंटे लगातार होंगे दर्शन
मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था के अनुसार महाशिवरात्रि पर रात 2:30 बजे कपाट खोले जाएंगे और 16 फरवरी की रात 11 बजे तक खुले रहेंगे। इस दौरान लगभग 44 घंटे निरंतर दर्शन का अवसर मिलेगा। गर्भगृह में विशेष महापूजा आयोजित की जाएगी। बाबा को सवा मन फल और पुष्पों से सुसज्जित मुकुट पहनाया जाएगा, जिससे विवाहोत्सव का वातावरण और भव्य बनेगा।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था
प्रशासन ने इस महापर्व पर लाखों भक्तों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग श्रेणियों के लिए प्रवेश व्यवस्था बनाई है। सामान्य दर्शन, 250 रुपये के शीघ्र दर्शन तथा वी.आई.पी श्रद्धालुओं के लिए पृथक मार्ग निर्धारित किए गए हैं। सामान्य भक्त शनिवार रात 12 बजे से कर्कराज पार्किंग स्थल से कतार में लग सकेंगे। प्रशासन का दावा है कि सुव्यवस्थित रूट और प्रबंधन के कारण लगभग 40 मिनट में दर्शन संभव हो सकेंगे।
कार्यक्रम का विस्तृत क्रम
रात 12 बजे से दर्शनार्थियों की लाइन प्रारंभ होगी।
2:30 बजे गर्भगृह के द्वार खुलेंगे और भस्म आरती संपन्न होगी।
तड़के 4:30 बजे से आम दर्शन शुरू होंगे और जलाभिषेक किया जाएगा।
सुबह 7:30 बजे बाल भोग तथा 10:30 बजे भोग आरती होगी।
दोपहर 12 बजे तहसील की ओर से और शाम 4 बजे होलकर व सिंधिया परिवार की ओर से पारंपरिक पूजा होगी।
रात 11 बजे महानिशाकाल में विशेष महापूजा आरंभ होकर पूरी रात चलेगी।
सोमवार तड़के 4 बजे भगवान को फल-फूलों से बने मुकुट से सजाया जाएगा।
सुबह 5 से 10 बजे तक मुकुट दर्शन होंगे और दोपहर 12 बजे भस्म आरती संपन्न होगी।
दोपहर 2:30 बजे भोग आरती के साथ महाशिवरात्रि का मुख्य अनुष्ठान पूर्ण होगा और पुजारियों का पारणा कराया जाएगा।
इसके पश्चात नियमित पूजन क्रम शुरू होगा तथा रात 11 बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।
कुल मिलाकर महाशिवरात्रि पर महाकाल मंदिर में आध्यात्मिक उल्लास, पारंपरिक विधि-विधान और सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं का संगम देखने को मिलेगा, जिससे श्रद्धालु सहज और सुरक्षित वातावरण में बाबा के दर्शन कर सकेंगे।