Edited By Niyati Bhandari,Updated: 18 Aug, 2026 11:58 AM

उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) से कहा कि वह अपनी जांच तेजी से पूरी करे और उसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाए। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या...
नई दिल्ली (एजैंसी): उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) से कहा कि वह अपनी जांच तेजी से पूरी करे और उसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाए। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने एसआईटी को निर्देश दिया कि वह कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच में हुई प्रगति पर अपनी वस्तुस्थिति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करे। इसने कहा, ‘एसआईटी (जिसमें एक फॉरेंसिक ऑडिटर भी शामिल है) उच्चतम न्यायालय को सीलबंद लिफाफे में वस्तुस्थिति रिपोर्ट सौंपेगी। पहले हम इस रिपोर्ट को देखेंगे और तय करेंगे कि इसे सभी पक्षों को जारी करना है या नहीं।’
पीठ ने अदालत द्वारा नियुक्त एसआईटी से यह भी कहा कि वह जांच की गुणवत्ता और पारदर्शिता में सुधार के लिए न्यायालय के सामने अलग-अलग पक्षकारों द्वारा दिए गए किसी भी सुझाव पर निष्पक्ष रूप से विचार करे।
इसने किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से अदालत की निगरानी में जांच का आग्रह कर रहे याचिकाकर्ताओं और जनहित में काम करने वाले अन्य लोगों को सॉलिसिटर जनरल के कार्यालय में सुझाव देने की अनुमति दे दी, जो चढ़ावा चोरी के आरोपों के संबंध में एसआईटी द्वारा की जाने वाली जांच के किसी भी पहलू पर हो सकते हैं।