Edited By Niyati Bhandari,Updated: 13 Feb, 2026 11:51 AM

Rangbhari Ekadashi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगभरी एकादशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस तिथि पर व्रत और...
Rangbhari Ekadashi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगभरी एकादशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस तिथि पर व्रत और विधिपूर्वक पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
रंगभरी एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं वर्ष 2026 में रंगभरी एकादशी की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और पारण का समय।

रंगभरी एकादशी 2026 की तिथि
एकादशी तिथि प्रारंभ: 27 फरवरी 2026, मध्यरात्रि 12:33 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 27 फरवरी 2026, रात 10:32 बजे
व्रत रखा जाएगा: 27 फरवरी 2026, शुक्रवार

रंगभरी एकादशी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
पूजा मुहूर्त: सुबह 6:48 बजे से 11:08 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:09 बजे से 5:58 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 बजे से 12:57 बजे तक
इन शुभ मुहूर्तों में भगवान विष्णु, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

रंगभरी एकादशी 2026 पारण का समय
पारण तिथि: 28 फरवरी 2026
पारण का समय: सुबह 6:59 बजे से 9:20 बजे तक
द्वादशी तिथि समाप्त: रात 8:43 बजे
धार्मिक नियमों के अनुसार एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना आवश्यक होता है।

रंगभरी एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल एकादशी के दिन विवाह के बाद भगवान शिव पहली बार माता पार्वती के साथ काशी पहुंचे थे। उनके आगमन की खुशी में देवताओं और काशीवासियों ने दीप-आरती, पुष्प, गुलाल और अबीर से उनका स्वागत किया था।
तभी से काशी में इस दिन शिव-पार्वती की विशेष पूजा और उनके साथ प्रतीकात्मक होली खेलने की परंपरा शुरू हुई। यही कारण है कि इसे रंगभरी एकादशी कहा जाता है।
इस दिन भगवान विष्णु के साथ भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा करने से सुख-समृद्धि, दांपत्य जीवन में मधुरता और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
