Sant Janabai Story : जनाबाई की भक्ति का जादू, जिनके उपलों से निकलती थी भगवान के नाम की ध्वनि

Edited By Updated: 10 Dec, 2025 08:48 AM

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Sant Janabai Story : महाराष्ट्र को संतों की धरती कहा जाता है। यहां अनेक संतों ने जन्म लेकर भक्ति और मानवता का संदेश दिया। इन्हीं महान संतों में से एक थे संत नामदेव, जो भगवान विट्ठल के परम भक्त माने जाते हैं। संत नामदेव जहां-जहां गए, वहां हरिनाम की...

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Sant Janabai Story : महाराष्ट्र को संतों की धरती कहा जाता है। यहां अनेक संतों ने जन्म लेकर भक्ति और मानवता का संदेश दिया। इन्हीं महान संतों में से एक थे संत नामदेव, जो भगवान विट्ठल के परम भक्त माने जाते हैं। संत नामदेव जहां-जहां गए, वहां हरिनाम की धारा बहती चली गई। उन्हीं के घर में रहती थीं उनकी दासी और शिष्या संत जनाबाई, जो बचपन से ही विट्ठल के प्रेम में डूबी हुई थीं। वे हर काम करते समय मन में निरंतर विट्ठल-विट्ठल का नाम जपती रहती थीं। जनाबाई बेहद सरल, भक्तिमयी और निष्कपट स्वभाव की थीं। लेकिन उनकी पड़ोसन उनसे ईर्ष्या रखती थी। जनाबाई की प्रसिद्धि और भक्ति को देख वह भीतर ही भीतर जलती थी। रोज़ ताने मारना, बातें सुनाना उसकी आदत बन चुकी थी, पर जनाबाई किसी भी कटु वचन का जवाब नहीं देती थीं। वह शांत मन से सिर्फ भगवान का नाम जपती रहती थीं।

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पड़ोसन की चाल
एक दिन पड़ोसन ने जनाबाई को बदनाम करने की ठान ली। जनाबाई रोज़ की तरह गोबर के उपले बना रही थीं। तभी पड़ोसन आई और दावा करने लगी कि ये उपले उसके हैं। बात बढ़ी और दोनों में विवाद हो गया। उसी समय राजा के सैनिक वहाँ से गुजरे और दोनों को न्याय के लिए राजा के दरबार में ले गए।

 राजा के सामने जनाबाई की परीक्षा
दरबार में राजा ने जनाबाई से पूछा कि तुम्हारे पास क्या सबूत है कि ये उपले तुम्हारे ही हैं ?

इस पर जनाबाई बड़ी सरलता से बोलीं,

महाराज, मैं हर काम विट्ठल के नाम का स्मरण करते हुए करती हूं। उपले बनाते समय भी मैंने विट्ठल-विट्ठल जपा था। यदि आप चाहें तो इन उपलों को कान के पास ले जाकर सुनें, इनमें भगवान का नाम गूंजेगा।

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सभा में बैठे लोग यह सुनकर आश्चर्यचकित रह गए।

राजा ने स्वयं उपले को कान से लगाया। और जैसे ही उसने सुना भीतर से विट्ठल-विट्ठल की मधुर ध्वनि आने लगी!

 राजा का भाव-विभोर होना
यह चमत्कार देखते ही राजा जनाबाई की भक्ति के सामने नतमस्तक हो गया। उसने उनके चरणों में झुककर क्षमा मांगी और पड़ोसन को उसकी झूठी शिकायत के लिए दंड दिया। पूरी सभा भगवान विट्ठल के नाम से गूंज उठी। जनाबाई की भक्ति, उनकी विनम्रता और सत्य के प्रति आस्था उस दिन सबके लिए प्रेरणा बन गई।

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