Sant Kabir Ke Pravachan : कबीर दास जी का अमर संदेश, कैसे छोड़ें जन्म-मृत्यु का चक्र ?

Edited By Updated: 05 Feb, 2026 12:43 PM

sant kabir ke pravachan

Sant Kabir Ke Pravachan : सन् 1518 में कबीर जी की आत्मा इस दुनिया को छोड़ कर परमात्मा में समा गई। कबीर जी का चेहरा हमेशा रूहानी ज्योति से चमकता रहता था।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

Sant Kabir Ke Pravachan : सन् 1518 में कबीर जी की आत्मा इस दुनिया को छोड़ कर परमात्मा में समा गई। कबीर जी का चेहरा हमेशा रूहानी ज्योति से चमकता रहता था।

मरता मरता जग मुवा औसर मुवा न कोई।
कबीर ऐसे मरि मना ज्यूं बहुरि न मरना होई॥


कबीर जी उपदेश देते हैं कि सांसारिक विषयों में फंस कर मरते-मरते यह संसार नष्ट हो रहा है लेकिन उचित अवसर पर मरना न आया। उन्होंने कहा - मन ऐसा मर जिससे फिर कभी मरना न पड़े। अर्थात तू जीवन-मृत्यु के चक्र से छूट जाए।

माया मुई न मन मुवा, मरि-मरि गया सरीर।
आसा त्रिष्णां नां मुई, यौं कहै दास कबीर॥


कबीर जी कहते हैं कि संसार में न माया मरती है, न माया के वशीभूत होने वाला मन मरता है, आशा और तृष्णा नहीं मरती, परन्तु यह शरीर बार-बार मरता है। आशा तृष्णा के कारण मनुष्य जन्म-मृत्यु के चक्र में फंसा रहता है।

रात गंवाई सोय कर, दिवस गवायो खाय।
हीरा जनम अमोल था, कौड़ी बदले जाय॥


कबीर जी कहते हैं कि हीरे के समान अमूल्य जीवन प्रभु के नाम स्मरण में न लगा कर मनुष्य ने व्यर्थ ही गंवा दिया। रात सोने में और दिन खाने में गंवा दिया।

हिंदू कहूं तो मैं नहीं, मुसलमान भी नाहि।
पांच तत्व का पूतरा, गैबी खेले माहि॥


वह कहते हैं कि मैं न हिंदू हूं, न मुसलमान। वह सभी मनुष्यों के समान पांच तत्वों की देह धारण किए हुए हैं जिसके अंदर अदृश्य आत्मा निवास करती है।

मनहो कठोर मेरे बनारस नरक न बांचिया जाई।
हर का संत मेरे हाड़ंवै त सगली सैन तराई॥

कबीर जी संदेश देते हैं कि कुछ लोग दूर-दूर से चल कर बनारस जाते हैं ताकि मुक्ति प्राप्त हो सके। उन्होंने साफ-साफ कह दिया कि कठोर हृदय पापी यदि बनारस मरता है तो नरक से बच नहीं सकता।

वहीं भक्ति करने वाले यदि मगहर में भी मरते हैं तो स्वयं को नहीं बल्कि शिष्यों तक को तार देते हैं। कबीर जी ने स्थान को प्राथमिकता नहीं दी बल्कि उन्होंने कर्मों को सर्वश्रेष्ठ माना और सत्य का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी।

कबीर जी ने रीति-रिवाजों और जात-पात के बन्धनों को बढ़ावा न दिया और सभी पाखंडों का जीवन भर विरोध किया। उन्होंने उपदेश दिया कि जो बातें तथा धारणाएं समाज में नफरत एवं दिलों में जलन पैदा करती हैं, उन्हें दूर रखना चाहिए ताकि समाज में एकजुटता, प्रेम व भाईचारा जाग उठे। उन्होंने लोगों को राजाओं, महाराजाओं के आगे भी न झुकने, आपसी प्रेम बढ़ाने और जात-पात की जंजीरों को तोड़ने का संदेश दिया।

कबीर जी के अंतिम संस्कार को लेकर उनके अनुयायियों में मतभेद हो गया। राजा वीर सिंह बघेला के अधीन हिन्दू शिष्य कबीर जी के शव का अंतिम संस्कार करना चाहते थे और नवाब बिजली खान सहित मुस्लिम शिष्य दफनाना चाहते थे। दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया और दोनों में लड़ाई की नौबत आ गई। उस समय कुछ शिष्यों ने शव की ओर ध्यान दिया तो कपड़ा हटाने पर शव की जगह फूल पाए गए।  

Trending Topics

IPL
Royal Challengers Bengaluru

190/9

20.0

Punjab Kings

184/7

20.0

Royal Challengers Bengaluru win by 6 runs

RR 9.50
img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!