Edited By Sarita Thapa,Updated: 09 Oct, 2026 07:32 PM

सनातन धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण, श्राद्ध और तर्पण के लिए महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस अवधि की अंतिम तिथि सर्वपितृ अमावस्या होती है।
Sarva Pitru Amavasya Bhog Thali Items 2026 : सनातन धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण, श्राद्ध और तर्पण के लिए महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस अवधि की अंतिम तिथि सर्वपितृ अमावस्या होती है। माना जाता है कि इस दिन उन पूर्वजों को निमित्त भी श्राद्ध किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु तिथि पता न हो या जिनका श्राद्ध किसी कारण निर्धारित तिथि पर न हो पाया हो। इस दिन पितरों के लिए भोजन तैयार करने, भोग अर्पित करने और जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा है माना जाता है कि श्राद्धापूर्वक किए गए इन कर्मों से पितरों के प्रति कृतक्षत व्यक्त होती है। आइए जानते हैं कि सर्वपितृ अमावस्या पर भोग की थाली में किन 5 चीजों को शामिल करना शुभ माना जाता है।
खीर को करें भोग में शामिल
पितृ पक्ष के दौरान खीर को पारंपरिक श्राद्ध भोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसे दूध, चावल और चीनी या गुड़ से तैयार किया जाता है। कई परिवारों में श्राद्ध के अवसर पर खीर बनाकर पितरों के निमित्त अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, खीर सात्विक भोजन का प्रतीक है। सर्वपितृ अमावस्या पर इसे भोग में शामिल करके पूर्वजों का स्मरण किया जा सकता है। खीर तैयार करते समय स्वच्छता और परिवार की परंपरा का ध्यान रखें।
पूरी और सब्जी
श्राद्ध के भोजन में पूरी और सब्जी बनाने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में प्रचलित है। कुछ परिवार इस अवसर पर मौसमी सब्जियों से सात्विक भोजन तैयार करते हैं। इसे पितरों के निमित्त बनाए जाने वाले पारंपरिक भोजन का हिस्सा माना जाता है। यदि आपके परिवार में श्राद्ध के दौरान पूरी और सब्जी बनाने की परंपरा है, तो सर्वपितृ अमावस्या पर भी इसे शामिल किया जासकता है। भोजन बनाते समय लहसुन-प्याज के इस्तेमाल को लेकर अपने परिवार की धार्मिक रीति का पालन करें।

चावल से बना भोजन
हिंदू धर्म में चावल का धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष स्थान है। श्राद्ध और तर्पण से जुड़ी कई परंपराओं में चावल का इस्तेमाल किया जाता है। पितरों के निमित्त तैयार किए जाने वाले भोजन में भी चावल शामिल किए जा सकते हैं। कुछ परिवार सादे चावल, खीर या चावल से बने अन्य सात्विक व्यंजन तैयार करते हैं। इसे पूर्वजों के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करने का एक माध्यम माना जाता है।
मौसमी फल
सर्वपितृ अमावस्या पर भोग की थाली में ताजे फल रखना भी एक अच्छा विकल्प है। फल पूजा-पाठ और धार्मिक अवसरों पर सामान्य रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं। अपनी सुविधा के अनुसार केला, सेब या अन्य मौसमी फल रखे जा सकते हैं। धार्मिक अवसरों पर फल अर्पित करने का उद्देश्य श्रद्धा के साथ पूजा करना होता है। भोग के लिए साफ और ताजे फल चुनें। बाद में इन्हें प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों के साथ साझा किया जा सकता है।
दाल और अन्य सात्विक व्यंजन
श्राद्ध के अवसर पर दाल और अन्य सात्विक व्यंजन भी बनाए जाते हैं। परिवार की परंपरा के अनुसार मूंग की दाल या दूसरी उपयुक्त दाल को भोजन में शामिल किया जा सकता है। कई घरों में श्राद्ध का भोजन सादा और सात्विक रखा जाता है। इस दिन भोजन की थाली तैयार करते समय अपनी पारिवारिक परंपराओं और स्थानीय रीति-रिवाजों का ध्यान रखना चाहिए। भोजन को श्रद्धापूर्वक तैयार करना और जरूरतमंदों को भोजन कराना भी इस दिन के महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल है।

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