Edited By Prachi Sharma,Updated: 13 Jan, 2026 02:17 PM

Shattila Ekadashi 2026 : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है लेकिन जब बात षटतिला एकादशी की आती है, तो इसका आध्यात्मिक फल कई गुना बढ़ जाता है। वर्ष 2026 की षटतिला एकादशी अत्यंत खास होने वाली है
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Shattila Ekadashi 2026 : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है लेकिन जब बात षटतिला एकादशी की आती है, तो इसका आध्यात्मिक फल कई गुना बढ़ जाता है। वर्ष 2026 की षटतिला एकादशी अत्यंत खास होने वाली है। इस बार न केवल तीन दुर्लभ शुभ योग बन रहे हैं बल्कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार 23 साल बाद एक ऐसा अद्भुत संयोग बन रहा है, जो भक्तों की झोली खुशियों से भर देगा।
23 साल बाद अद्भुत संयोग और 3 शुभ योग
ज्योतिषविदों के अनुसार, 2026 की यह एकादशी कई मायनों में ऐतिहासिक है। 23 वर्षों के बाद ग्रहों की ऐसी स्थिति बन रही है जो साधकों को सिद्धियाँ प्रदान करने वाली है। इस दिन मुख्य रूप से तीन योगों का मिलन हो रहा है-
सर्वार्थ सिद्धि योग: इस योग में किया गया कोई भी कार्य सफल होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
अमृत सिद्धि योग: यह योग स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करने वाला माना जाता है।
प्रीति योग: आपसी प्रेम और पारिवारिक सुख-शांति बढ़ाने के लिए यह योग अत्यंत शुभ है।

षटतिला का अर्थ और तिल का 6 प्रकार से उपयोग
षट का अर्थ है छह और तिला का अर्थ है तिल। इस व्रत में तिल का छह विशिष्ट तरीकों से उपयोग करना अनिवार्य माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जो व्यक्ति इन छह तरीकों से तिल का उपयोग करता है, उसे हजारों वर्षों की तपस्या के समान फल मिलता है:
तिल स्नान: पानी में तिल डालकर स्नान करना।
तिल उबटन: शरीर पर तिल का लेप लगाना।
तिल तर्पण: पितरों को तिल मिश्रित जल अर्पित करना।
तिल दान: ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को तिल का दान।
तिल भोजन: फलाहार में तिल का सेवन करना।
तिल हवन: पूजा के दौरान अग्नि में तिल की आहुति देना।
