Rangbhari Ekadashi 2026 : काशी में रंगभरी एकादशी की धूम, मां गौरा को चढ़ी नौ दुर्गा मंत्रों से अभिमंत्रित हल्दी

Edited By Updated: 25 Feb, 2026 08:39 AM

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Rangbhari Ekadashi 2026 : महाशिवरात्रि पर शिव-विवाह संपन्न होने के बाद काशी में अब बाबा और मां गौरा के गौने की पारंपरिक रस्मों की शुरुआत हो गई है। यह लोकाचार रंगभरी एकादशी तक विधि-विधान से निभाया जाएगा। इस दौरान बाबा की भव्य पालकी यात्रा भी निकाली...

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Rangbhari Ekadashi 2026 : महाशिवरात्रि पर शिव-विवाह संपन्न होने के बाद काशी में अब बाबा और मां गौरा के गौने की पारंपरिक रस्मों की शुरुआत हो गई है। यह लोकाचार रंगभरी एकादशी तक विधि-विधान से निभाया जाएगा। इस दौरान बाबा की भव्य पालकी यात्रा भी निकाली जाएगी, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह रहता है।

टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास, जिसे गौरा-सदनिका के रूप में सजाया गया है, इन दिनों गौरा के मायके का स्वरूप लिए हुए है। यहां नौ गौरी और नौ दुर्गा के आह्वान मंत्रों से अभिमंत्रित पवित्र हल्दी मां गौरा को अर्पित की जा रही है। यह हल्दी Durga Kund Temple से गाजे-बाजे के साथ पूजा स्थल तक लाई जाती है, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बन जाता है।

आयोजक पंडित वाचस्पति तिवारी ने जानकारी दी कि रंगभरी एकादशी के अवसर पर Kashi Vishwanath Temple की ऐतिहासिक पालकी यात्रा निकाली जाएगी। गौने की रस्में मंगलवार से शुरू होकर 27 फरवरी तक चलेंगी। हल्दी-तेल की परंपरागत रस्में महंत आवास में संपन्न हो चुकी हैं।

25 फरवरी को दोपहर में बाबा की पालकी का विधिवत पूजन होगा और शाम को षोडशी श्रृंगार किया जाएगा। पालकी की सजावट और रंग-रोगन का कार्य पूरा कर लिया गया है। श्रृंगार के दौरान बाबा को पारंपरिक काशी शैली में रेशमी वस्त्र, स्वर्ण आभूषण, पुष्पमालाएं और चंदन-रोली से अलंकृत कर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ प्रस्तुत किया जाएगा।

26 फरवरी की शाम बाबा प्रतीकात्मक रूप से गौरा का गौना लेने गौरा-सदनिका पहुंचेंगे। इस अवसर पर उन्हें राजसी वेशभूषा पहनाई जाएगी और विशेष देव किरीट धारण कराया जाएगा। पारंपरिक कारीगर इस किरीट और वस्त्रों को सजा रहे हैं, जिससे बाबा का रूप और भी दिव्य दिखाई देगा।

27 फरवरी को पालकी यात्रा महंत आवास से प्रारंभ होकर निर्धारित मार्ग से गुजरते हुए विश्वनाथ मंदिर पहुंचेगी। यात्रा नवग्रह मंदिर, विश्वनाथ गली, साक्षी विनायक, ढुंढिराज गणेश और अन्नपूर्णा मंदिर के सामने से होती हुई मंदिर परिसर में प्रवेश करेगी। इसके बाद चल प्रतिमा सहित पालकी को गर्भगृह के दक्षिण द्वार से अंदर ले जाकर विधिवत विराजमान कराया जाएगा। शयन आरती के उपरांत पालकी पुनः टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास लौट आएगी।
 

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