Edited By Prachi Sharma,Updated: 10 Mar, 2026 02:10 PM

Sheetala Ashtami Upay : हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है, जिसे लोक भाषा में बसौड़ा भी कहते हैं। यह पर्व मुख्य रूप से शीतला माता को समर्पित है, जिन्हें आरोग्यता, स्वच्छता और शीतलता की...
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Sheetala Ashtami Upay : हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है, जिसे लोक भाषा में बसौड़ा भी कहते हैं। यह पर्व मुख्य रूप से शीतला माता को समर्पित है, जिन्हें आरोग्यता, स्वच्छता और शीतलता की देवी माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शीतला माता की पूजा करने से परिवार, विशेषकर संतान को चेचक, खसरा और आंखों की बीमारियों जैसी संक्रामक व्याधियों से मुक्ति मिलती है। शीतला अष्टमी का दिन मां की विशेष कृपा पाने और अपनी संतान के आरोग्य व सुखद भविष्य की कामना करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस दिन कुछ विशेष उपायों को करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और बच्चों पर आने वाली विपत्तियां टल जाती हैं।
संतान की सुरक्षा और सुख के लिए 5 अचूक उपाय
बासी भोजन का नैवेद्य
शीतला अष्टमी के दिन ताजा भोजन नहीं बनाया जाता। एक दिन पहले ही मीठे चावल, पूड़ी, राबड़ी और चने की दाल जैसे पकवान बना लिए जाते हैं। अष्टमी की सुबह जल्दी उठकर शीतल जल से स्नान करें और संतान के साथ माता के मंदिर जाएं। उन्हें बासी भोजन का भोग लगाएं। ऐसा करने से संतान की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और उसे मौसमी बीमारियों से सुरक्षा मिलती है।
हल्दी का तिलक और स्वास्तिक
हल्दी को आयुर्वेद और ज्योतिष में शुद्धता और सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। शीतला माता की पूजा में हल्दी का विशेष प्रयोग होता है। पूजा के समय माता को हल्दी अर्पित करें। इसके बाद उसी हल्दी से अपनी संतान के माथे पर तिलक लगाएं और घर के मुख्य द्वार पर दोनों तरफ हल्दी के स्वास्तिक बनाएं। हल्दी का तिलक संतान को नकारात्मक शक्तियों और बुरी नजर से बचाता है। द्वार पर बना स्वास्तिक घर में सुख-समृद्धि का प्रवेश सुनिश्चित करता है।
नीम के जल का छिड़काव
शीतला माता का निवास नीम के पेड़ में माना जाता है। नीम अपनी औषधीय गुणों के कारण संक्रमण दूर करने में सहायक है। अष्टमी के दिन एक लोटे में जल भरें और उसमें नीम के कुछ ताजे पत्ते डाल दें। पूजा के बाद इस जल को पूरे घर में और विशेषकर संतान के सोने के कमरे में छिड़कें। यह उपाय घर के वातावरण को शुद्ध करता है और त्वचा संबंधी रोगों को दूर रखने में मदद करता है।

झाड़ू और सूप का दान
माता शीतला के हाथों में झाड़ू और सूप होता है, जो सफाई का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस दिन किसी मंदिर में नई झाड़ू या अनाज साफ करने वाला सूप दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, झाड़ू का दान करने से दरिद्रता दूर होती है और बच्चों के जीवन से बाधाएं समाप्त होती हैं। यह उपाय संतान के करियर में आने वाली रुकावटों को भी दूर करता है।
जल पात्र का दान और पक्षियों की सेवा
गर्मी की शुरुआत में जल का दान महादान माना गया है। शीतला माता जल की अधिष्ठात्री भी हैं। अष्टमी के दिन किसी गरीब व्यक्ति को मिट्टी का घड़ा दान करें या किसी सार्वजनिक स्थान पर प्याऊ की व्यवस्था में सहयोग दें। साथ ही, पक्षियों के लिए किसी पात्र में जल भरकर रखें।निस्वार्थ भाव से किया गया जल दान संतान के भाग्य को उदय करता है और उसे दीर्घायु प्रदान करता है।
