क्या थे भगवान श्री कृष्ण के अंतिम शब्द ? जानिए गीता से जुड़ा यह अनसुना रहस्य !

Edited By Updated: 26 Feb, 2026 01:40 PM

shri krishna last words

Shri Krishna Last Words : मान्यता है कि जो भी इस संसार में जन्म लेता है, उसे एक दिन मृत्यु का सामना करना ही पड़ता है। यही नियम भगवान के अवतारों पर भी लागू होता है। Krishna को Vishnu का आठवां अवतार माना जाता है, जिन्होंने मानव रूप में पृथ्वी पर अवतार...

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Shri Krishna Last Words : मान्यता है कि जो भी इस संसार में जन्म लेता है, उसे एक दिन मृत्यु का सामना करना ही पड़ता है। यही नियम भगवान के अवतारों पर भी लागू होता है। Krishna को Vishnu का आठवां अवतार माना जाता है, जिन्होंने मानव रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया। इसलिए उनके जीवन का अंत भी सांसारिक नियमों के अनुसार ही हुआ। उनके जन्म की कथा जितनी प्रसिद्ध है, उतनी ही जिज्ञासा लोगों के मन में उनकी मृत्यु और अंतिम वचनों को लेकर भी रहती है।

धार्मिक ग्रंथों, विशेषकर Shrimad Bhagavata Purana में उल्लेख मिलता है कि श्रीकृष्ण ने गुजरात के भालका तीर्थ में अपने देह का त्याग किया। कहा जाता है कि वे एक पीपल वृक्ष के नीचे विश्राम कर रहे थे। उसी समय ‘जरा’ नामक एक शिकारी वहां से गुजरा। दूर से उसे श्रीकृष्ण का पैर किसी हिरण जैसा प्रतीत हुआ और उसने अनजाने में बाण चला दिया। तीर श्रीकृष्ण के दाहिने पैर के अंगूठे में लगा।

जब शिकारी को अपनी भूल का एहसास हुआ तो वह भय और पश्चाताप से भर उठा। वह श्रीकृष्ण के चरणों में गिरकर क्षमा याचना करने लगा। किंतु श्रीकृष्ण ने उसे सांत्वना दी और समझाया कि यह सब नियति का विधान है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं भी इस लीला का हिस्सा है और उसे अपराधबोध नहीं करना चाहिए। उनके इन शब्दों को ही उनके अंतिम उपदेश के रूप में देखा जाता है कि संसार में जो कुछ भी घटित होता है, वह कर्म और पूर्वनियोजित व्यवस्था के अनुसार होता है।

कुछ कथाओं में यह भी वर्णन मिलता है कि उनकी मृत्यु एक पूर्व जन्म के श्राप से जुड़ी थी। त्रेता युग में जब Rama ने बाली का वध छिपकर किया था, तब बाली ने उन्हें श्राप दिया था कि अगले जन्म में उन्हें भी इसी प्रकार मृत्यु का सामना करना पड़ेगा। माना जाता है कि उसी श्राप के प्रभाव से कृष्ण अवतार में उनका अंत एक बाण से हुआ।

इस प्रकार श्रीकृष्ण की मृत्यु केवल एक घटना नहीं, बल्कि कर्म, नियति और ईश्वरीय लीला का संदेश मानी जाती है। उनके अंतिम शब्द आज भी यह सिखाते हैं कि जीवन की हर घटना के पीछे कोई न कोई गूढ़ कारण होता है, जिसे मनुष्य को धैर्य और समझ के साथ स्वीकार करना चाहिए।

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