Shukra Pradosh Vrat Katha In Hindi: शिव कृपा और सुख-समृद्धि का वरदान चाहते हैं तो पढ़ें, शुक्र प्रदोष व्रत कथा

Edited By Updated: 16 Jan, 2026 08:34 AM

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Shukra Pradosh Vrat 2026: साल 2026 का पहला प्रदोष व्रत शुक्रवार, 16 जनवरी को माघ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाएगा। शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण यह शुक्र प्रदोष व्रत कहलाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव की पूजा,...

Shukra Pradosh Vrat 2026: साल 2026 का पहला प्रदोष व्रत शुक्रवार, 16 जनवरी को माघ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाएगा। शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण यह शुक्र प्रदोष व्रत कहलाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव की पूजा, व्रत और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करने से जीवन के सभी दुख, रोग और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं।

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शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व
ज्योतिष और पुराणों के अनुसार, शुक्रवार का संबंध शुक्र ग्रह से होता है, जो वैवाहिक सुख, ऐश्वर्य, सौंदर्य और समृद्धि का कारक माना जाता है। शुक्र प्रदोष व्रत करने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है। आर्थिक संकट दूर होते हैं। रोग और बाधाएं समाप्त होती हैं। शिव कृपा से जीवन में स्थिरता आती है। इस दिन प्रदोष काल में शिव पूजा और व्रत कथा का पाठ विशेष फलदायी माना गया है।

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शुक्र प्रदोष व्रत कथा (Shukra Pradosh Vrat Katha In Hindi)
पुराणों में शुक्र प्रदोष व्रत की एक अत्यंत प्रेरणादायक कथा का वर्णन मिलता है।

तीन मित्रों की कथा
प्राचीन समय की बात है, एक नगर में तीन घनिष्ठ मित्र रहते थे एक ब्राह्मण, दूसरा धनिक और तीसरा राजा का पुत्र। तीनों विवाहित थे लेकिन धनिक मित्र की पत्नी अभी गौना न होने के कारण मायके में रहती थी। एक दिन तीनों मित्र बैठकर बातचीत कर रहे थे। बातचीत के दौरान ब्राह्मण मित्र ने कहा, “नारी के बिना घर भूतों का निवास बन जाता है।”

यह बात धनिक पुत्र के मन को लग गई और उसने उसी समय अपनी पत्नी को मायके से लाने का निर्णय कर लिया।

शुक्र अस्त की अनदेखी
जब धनिक पुत्र के माता-पिता को यह बात पता चली तो उन्होंने उसे समझाया कि उस समय शुक्र अस्त हैं, जो वैवाहिक जीवन के लिए अशुभ माने जाते हैं। लेकिन धनिक पुत्र अपनी जिद पर अड़ा रहा। ससुराल पहुंचने पर सास-ससुर ने भी उसे समझाया, लेकिन उसने किसी की बात नहीं मानी और पत्नी को लेकर लौट पड़ा।

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कष्टों की शुरुआत
रास्ते में एक के बाद एक विपत्तियां आने लगीं। बैलगाड़ी का पहिया टूट गया। बैल की टांग टूट गई। पति-पत्नी घायल हो गए। डाकुओं ने सारा धन लूट लिया। घर पहुंचने पर धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया। वैद्य ने भविष्यवाणी की कि तीन दिन में उसकी मृत्यु हो जाएगी।

शिव भक्ति से बदली किस्मत
यह सब जानकर ब्राह्मण मित्र ने धनिक के पिता को बताया कि यह सब कष्ट शुक्र अस्त के दौरान पत्नी को लाने के कारण आए हैं।

ब्राह्मण ने उपाय बताया पुत्र को पुनः ससुराल भेज दिया जाए। स्वयं शुक्र प्रदोष व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा की जाए। धनिक ने ऐसा ही किया। शिव कृपा से पुत्र का विष उतर गया और वह पूर्ण रूप से स्वस्थ हो गया। इसके बाद उसके जीवन से सभी संकट दूर हो गए।

कथा का सार
यह कथा सिखाती है कि शुभ-अशुभ समय का ध्यान रखना आवश्यक है। शुक्र प्रदोष व्रत दांपत्य और धन संबंधी दोषों को दूर करता है। भगवान शिव की सच्ची भक्ति से असंभव भी संभव हो जाता है

शुक्र प्रदोष व्रत में क्या करें (Upay)
प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें
व्रत कथा का पाठ या श्रवण अवश्य करें
गरीबों को सफेद वस्त्र या मिठाई का दान करें

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