Edited By Prachi Sharma,Updated: 16 Mar, 2026 08:35 AM

Som Pradosh Vrat 2026 March : हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है और जब यह व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसे सोम प्रदोष कहा जाता है। चैत्र मास हिंदू नववर्ष का प्रथम मास होता ह इसलिए इस महीने में आने वाले सोम प्रदोष व्रत का धार्मिक और...
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Som Pradosh Vrat 2026 March : हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है और जब यह व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसे सोम प्रदोष कहा जाता है। चैत्र मास हिंदू नववर्ष का प्रथम मास होता ह इसलिए इस महीने में आने वाले सोम प्रदोष व्रत का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ रहा है, जो शिव भक्तों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। इस समय की गई पूजा न केवल कष्टों को हरती है, बल्कि सोमवार का दिन होने के कारण जातक की कुंडली में स्थित चंद्र दोष का भी निवारण करती है।
सोम प्रदोष का शुभ संयोग और महत्व
दोहरा फल: सोमवार और प्रदोष के संयोग से पूजा का फल दोगुना प्राप्त होता है। जहां प्रदोष व्रत से सुख-समृद्धि मिलती है, वहीं सोमवार के प्रभाव से मानसिक शांति और पारिवारिक खुशहाली आती है।
मनोकामना पूर्ति: सोम प्रदोष का व्रत रखने वाले जातकों की सभी जायज मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से वे लोग जो लंबे समय से किसी बीमारी या तनाव से जूझ रहे हैं, उन्हें इस दिन विशेष लाभ मिलता है।
चंद्र दोष से मुक्ति का अचूक उपाय
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। यदि कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो या विष योग जैसे दोष हों, तो व्यक्ति मानसिक अशांति, अनिर्णय और स्वास्थ्य समस्याओं से घिरा रहता है। चूंकि भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया है इसलिए उनकी पूजा से चंद्र दोष शांत होता है।

महामंत्र का जाप:
चंद्र दोष को दूर करने के लिए प्रदोष काल में इस मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए:
"ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः"
अथवा भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र: "नमः शिवाय"
ॐ सों सोमाय नमः
विशेष उपाय:
दूध से अभिषेक: शिवलिंग पर कच्चा गाय का दूध अर्पित करने से चंद्रमा मजबूत होता है।
सफेद वस्तुओं का दान: शाम के समय चावल, चीनी या सफेद वस्त्र का दान करें।
शीतल जल: भगवान शिव को शीतल जल में गंगाजल मिलाकर अर्पित करें।
