Edited By Sarita Thapa,Updated: 11 May, 2026 01:23 PM

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को बहुत शुभ और पवित्र माना जाता है। यह दिन देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए बहुत खास होता है। हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत मनाया जता है।
Guru Pradosh Vrat 2026 : हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को बहुत शुभ और पवित्र माना जाता है। यह दिन देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए बहुत खास होता है। हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत मनाया जता है। गुरुवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को गुरु प्रदोष कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से शिव जी की पूजा करने और व्रत रखने से मन की हर मुराद पूरी होती है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही जीवन से नकारात्मकता दूर होती है। इस दिन भगवान शिव के मंत्रों का जाप करने और कुछ विशेष उपाय करने से फलदायक परिणाम प्राप्त होते हैं। तो आइए जानते हैं गुरु प्रदोष के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में-
गुरु प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 14 मई 2026 की रात 11 बजकर 21 मिनट से होगी और इसका समापन 15 मई 2026 को सुबह 08 बजकर 32 मिनट पर होगा। 14 मई, 2026 को गुरु प्रदोष व्रत रखा जाएगा। प्रदोष काल में शाम को पूजा करने का महत्व है। इसलिए प्रदोष व्रत की शुरुआत शाम 05 बजकर 22 मिनट से शाम 07 बजकर 04 मिनट तक रहेगा।

गुरु प्रदोष व्रत पूजा विधि
गुरु प्रदोष ल्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।
फिर घर के मंदिर की सफाई करने के बाद गंगाजल का छिड़काव करें और व्रत का संकल्प लें।
अब एक चौकी पर शिव जी या शिव पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
उसके बाद शिव जी को भांग, धतूरा, बेलपत्र, शमी के फूल अर्पित करें।
फिर शिव जी के नामों और मंत्रों का जाप करें और उनका ध्यान करें।
अंत में शिव जी के समक्ष घी का दीपक जलाएं और आरती करें।

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