जब श्री राम के आगे नहीं टिक पाए रावण के रथ

Edited By Updated: 16 Jul, 2020 10:27 AM

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भगवान श्रीराम व रावण युद्ध क्षेत्र में आमने-सामने थे। रावण के साथ विशाल सेना थी। अनेक योद्धा रथ पर सवार होकर युद्ध के लिए तत्पर थे।

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भगवान श्रीराम व रावण युद्ध क्षेत्र में आमने-सामने थे। रावण के साथ विशाल सेना थी। अनेक योद्धा रथ पर सवार होकर युद्ध के लिए तत्पर थे। विभीषण शंकाग्रस्त होकर श्रीराम से बोले, ‘‘नाथ न रथ, नहीं तन पद बाना, कहि बिधि जितब वीर बलवाना।’’ 
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हे नाथ न आपके पास रथ है न तन की रक्षा करने वाले साधन हैं। ऐसी स्थिति में महाबली रावण से आप कैसे विजय प्राप्त करेंगे?’’

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भगवान श्रीराम विभीषण के शब्द सुनकर मुस्कुराए तथा बोले, ‘‘भक्तराज, विजय दिलाने वाला रथ नहीं होता जो सामने दिखाई दे रहा है। विजय दिलाने वाले दिव्य रथ के पहिए होते हैं-शौर्य व धैर्य। उस रथ की पताका होती है सत्य व शील। बल, विवेक व परोपकार रूपी घोड़े उसे खींचते हैं। क्षमा, दया और समता रूपी रस्सी रथ व घोड़ों को जोड़े रखती है।’’

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भगवान श्रीराम के मुख से रथ की व्याख्या सुनकर विभीषण निश्चिंत हो गए। वह समझ गए कि रावण के रथ, रथहीन श्री राम के सामने रुक नहीं पाएंगे।

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