Edited By Niyati Bhandari,Updated: 06 Apr, 2026 04:31 PM

Varuthini Ekadashi Vrat Date: वरुथिनी एकादशी 2026 का व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा। सही विधि और श्रद्धा से किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, आध्यात्मिक उन्नति और सुख-समृद्धि प्रदान करता है। इस पावन दिन भगवान विष्णु की आराधना करके आप अपने...
Varuthini Ekadashi Vrat Date: वरुथिनी एकादशी 2026 का व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा। सही विधि और श्रद्धा से किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, आध्यात्मिक उन्नति और सुख-समृद्धि प्रदान करता है। इस पावन दिन भगवान विष्णु की आराधना करके आप अपने जीवन में शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं।
वरुथिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वरुथिनी एकादशी अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। यह व्रत पापों का नाश करता है। जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है। मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। कहा जाता है कि इस व्रत का फल हजारों वर्षों की तपस्या के समान होता है।
कब है वरुथिनी एकादशी 2026?
वरुथिनी एकादशी की तिथि को लेकर इस वर्ष श्रद्धालुओं के बीच थोड़ा भ्रम बना हुआ है।
पंचांग के अनुसार:
एकादशी तिथि प्रारंभ: 13 अप्रैल 2026, रात 1:17 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 14 अप्रैल 2026, रात 1:08 बजे
हिंदू धर्म में व्रत उदय तिथि के आधार पर रखा जाता है, इसलिए वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) को रखा जाएगा।

वरुथिनी एकादशी शुभ मुहूर्त और पूजा का समय
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। सुबह का समय भगवान विष्णु की पूजा के लिए श्रेष्ठ है। वरुथिनी एकादशी व्रत का संकल्प सूर्योदय के बाद लिया जा सकता है। शाम को दीपदान और स्तोत्र पाठ विशेष फलदायी होता है।
वरुथिनी एकादशी पूजा विधि
भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत की पूजा विधि इस प्रकार है:
सुबह स्नान कर स्वच्छ (विशेषकर पीले) वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर चौकी पर विष्णु जी या वराह अवतार की प्रतिमा स्थापित करें।
अक्षत, पीले फूल, फल और चंदन अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर आरती करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
वरुथिनी एकादशी विशेष ध्यान:
तुलसी दल अर्पित करना अनिवार्य माना गया है, इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।

शाम के समय:
घी का दीपक जलाएं। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
व्रत के दौरान क्या करें और क्या न करें
क्या करें:
मन, वचन और कर्म से शुद्धता बनाए रखें।
दान-पुण्य करें।
भगवान का ध्यान और भजन करें।
क्या न करें:
चावल का सेवन न करें।
लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन से बचें।
क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
