Edited By Tanuja,Updated: 06 Apr, 2026 01:32 PM

अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थ 45 दिन के युद्धविराम पर गंभीर चर्चा कर रहे हैं। Axios के मुताबिक यह समझौता मुश्किल है, लेकिन विफलता की स्थिति में बड़े हमले और खाड़ी क्षेत्र में व्यापक तबाही का खतरा बढ़ सकता है।
International Desk: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण संघर्ष को रोकने के लिए अब कूटनीतिक स्तर पर तेज हलचल शुरू हो गई है। दोनों देशों के साथ-साथ कई क्षेत्रीय मध्यस्थ 45 दिन के संभावित युद्धविराम (सीजफायर) पर बातचीत कर रहे हैं, जिसे इस युद्ध को रोकने की आखिरी बड़ी कोशिश माना जा रहा है। Axios की रिपोर्ट के अनुसार, इन बातचीतों में अमेरिका, इजराइल और खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों के अधिकारी भी शामिल हैं। हालांकि, रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अगले 48 घंटों के भीतर किसी ठोस समझौते तक पहुंचने की संभावना बहुत कम है।
ईरान और अमेरिका को एक मसौदा प्रस्ताव मिला है, जिसमें 45 दिन के युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बात कही गई है ताकि युद्ध समाप्त करने का रास्ता निकाला जा सके। पश्चिम एशिया के दो अधिकारियों के अनुसार, यह प्रस्ताव मिस्र, पाकिस्तान और तुर्किये के मध्यस्थों द्वारा तैयार किया गया है, जो संघर्ष को रोकने के प्रयास में जुटे हैं। उनका मानना है कि 45 दिन की यह अवधि दोनों देशों के बीच व्यापक वार्ता के लिए पर्याप्त समय देगी, जिससे स्थायी युद्धविराम पर सहमति बन सके।
अधिकारियों ने बताया कि यह प्रस्ताव रविवार देर रात ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और पश्चिम एशिया में अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ को भेजा गया, लेकिन अब तक दोनों देशों ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। अधिकारियों ने निजी वार्ताओं पर चर्चा करने के लिए नाम न उजागर करने की शर्त पर यह जानकारी दी। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्ष इन शर्तों को स्वीकार करेंगे या नहीं। ईरान का कहना है कि वह तब तक लड़ाई जारी रखेगा जब तक उसे वित्तीय क्षतिपूर्ति और भविष्य में फिर से हमले न होने का आश्वासन नहीं मिल जाता। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर बमबारी की धमकी दी है। इस प्रस्ताव की शर्तों की जानकारी सबसे पहले समाचार वेबसाइट एक्सियोस ने दी।
क्यों अहम है यह 45 दिन का सीजफायर?
यह प्रस्तावित युद्धविराम केवल अस्थायी राहत नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। इन 45 दिनों के दौरान दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई रोक सकते हैं, मानवीय सहायता पहुंचाई जा सकती है व स्थायी शांति समझौते की नींव रखी जा सकती है। अगर यह वार्ता सफल होती है, तो लंबे समय से चल रहे इस संघर्ष को खत्म करने का रास्ता खुल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर यह कूटनीतिक प्रयास विफल होता है, तो हालात बहुत तेजी से बिगड़ सकते हैं। संभावित खतरे इस प्रकार हैं।
- ईरान के नागरिक ढांचे जैसे बिजली संयंत्र (पावर प्लांट) और पुलों पर बड़े हमले
- जवाब में खाड़ी देशों में तेल, गैस और पानी से जुड़े महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला
- पूरे मिडिल ईस्ट में व्यापक सैन्य टकराव
- इससे न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बड़ा संकट पैदा हो सकता है।
इस वार्ता में क्षेत्रीय मध्यस्थ अहम भूमिका निभा रहे हैं। उनका लक्ष्य दोनों पक्षों को समझौते की मेज पर बनाए रखना और युद्ध को बड़े स्तर पर फैलने से रोकना है। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच अविश्वास बहुत ज्यादा है, जिससे समझौता कठिन हो गया है। 45 दिन का संभावित सीजफायर इस समय मिडिल ईस्ट में शांति की आखिरी बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया है। लेकिन अगर यह वार्ता असफल होती है, तो क्षेत्र में बड़े हमले, जवाबी कार्रवाई और वैश्विक संकट की आशंका काफी बढ़ जाएगी।