Edited By Sarita Thapa,Updated: 11 Jan, 2026 02:41 PM

सनातन परंपरा में जन्म से लेकर मृत्यु तक सोलह संस्कारों का विधान है, जिनमें अंतिम समय का दान आत्मा की शांति के लिए अनिवार्य माना गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के पश्चात जीवात्मा को यमलोक की अत्यंत दुर्गम और कष्टकारी राहों से गुजरना पड़ता है।
Why Cow is Donated Before Death : सनातन परंपरा में जन्म से लेकर मृत्यु तक सोलह संस्कारों का विधान है, जिनमें अंतिम समय का दान आत्मा की शांति के लिए अनिवार्य माना गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के पश्चात जीवात्मा को यमलोक की अत्यंत दुर्गम और कष्टकारी राहों से गुजरना पड़ता है। इस मार्ग में सबसे बड़ी बाधा वैतरणी नदी को माना गया है, जिसे पार करना किसी भी साधारण आत्मा के लिए असंभव है। ऐसी मान्यता है कि मृत्यु से पूर्व किया गया गौ दान उस समय जीवात्मा के लिए एक नौका के समान कार्य करता है। तो आइए जानते हैं कि क्यों एक गाय का दान मृत्यु के भय को मिटाकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है और कैसे यह दान परलोक की यात्रा में आपका सबसे बड़ा सहायक बनता है।
वैतरणी नदी को पार करने का एकमात्र सहारा
गरुड़ पुराण में वर्णन है कि यमलोक के मार्ग में वैतरणी नाम की एक अत्यंत भयानक और कष्टकारी नदी पड़ती है। यह नदी रक्त, मवाद और गंदगी से भरी होती है। जो आत्माएं अपने जीवनकाल में पुण्य नहीं करतीं, उन्हें इस नदी को पार करने में भारी कष्ट होता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति अपने जीवन में या मृत्यु के समय गाय का दान करता है, वह गाय उस जीवात्मा को वैतरणी नदी के बीच में मिलती है और अपनी पूंछ पकड़कर उसे सकुशल पार करवा देती है।
यमदूतों के भय से मुक्ति
गरुड़ पुराण के अनुसार, गौ दान करने वाले व्यक्ति को यमदूत प्रताड़ित नहीं करते। गाय को हिंदू धर्म में 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास स्थान माना गया है। गाय का दान करने से सभी देवता प्रसन्न होते हैं, जिससे व्यक्ति के पापों का प्रभाव कम हो जाता है और मृत्यु के समय होने वाला मानसिक व शारीरिक कष्ट भी कम होता है।

मोक्ष और सद्गति की प्राप्ति
दान की महिमा बताते हुए शास्त्रों में कहा गया है कि 'गौ' केवल एक पशु नहीं, बल्कि साक्षात मोक्ष का द्वार है। अंतिम समय में किया गया गौ दान व्यक्ति को सांसारिक मोह-माया से मुक्त कर भगवान विष्णु के धाम (वैकुंठ) की ओर ले जाता है। यह दान पितरों को भी तृप्ति प्रदान करता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी कल्याणकारी माना जाता है।
दान का सही स्वरूप क्या है ?
शास्त्रों के अनुसार, गौ दान हमेशा स्वस्थ और बछड़े वाली गाय का करना चाहिए। यदि शारीरिक या आर्थिक कारणों से साक्षात गाय का दान संभव न हो, तो गाय के मूल्य के बराबर स्वर्ण या धन का दान भी फलदायी माना गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह दान पूर्ण श्रद्धा और बिना किसी अहंकार के किया जाना चाहिए।

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