Edited By Mansi,Updated: 03 Mar, 2026 04:03 PM

आज पूरा देश 'राष्ट्रीय विज्ञान दिवस' मना रहा है, और इस खास मौके पर नोएडा के सेक्टर-62 स्थित जेएसएस यूनिवर्सिटी में विज्ञान का एक अनोखा महाकुंभ देखने को मिला। 'साइएस्ट्रा दिवस 2026' के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में देश के जाने-माने वैज्ञानिकों और...
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। आज पूरा देश 'राष्ट्रीय विज्ञान दिवस' मना रहा है, और इस खास मौके पर नोएडा के सेक्टर-62 स्थित जेएसएस यूनिवर्सिटी में विज्ञान का एक अनोखा महाकुंभ देखने को मिला। 'साइएस्ट्रा दिवस 2026' के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में देश के जाने-माने वैज्ञानिकों और भविष्य के शोधकर्ताओं ने एक मंच पर शिरकत की।
मालूम हो कि, नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी.वी. रमन की याद में हर साल 28 फरवरी को विज्ञान दिवस मनाया जाता है। लेकिन नोएडा में इस बार नज़ारा कुछ अलग था। साइएस्ट्रा द्वारा आयोजित इस ऑफलाइन कार्यक्रम में केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि 'रिसर्च' को एक लाइफटाइम करियर बनाने का मंत्र दिया गया है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, मशहूर परमाणु वैज्ञानिक डॉ. ए. पी. जयरामन और इसरो के पूर्व वैज्ञानिक प्रो. दीपक सिंह ने दीप प्रज्वलित कर सत्र की शुरुआत की।
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के पूर्व मीडिया प्रमुख डॉ. जयरामन ने छात्रों को संबोधित करते हुए "वैज्ञानिक सामाजिक जिम्मेदारी" का नया विचार दिया। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक बड़ी प्रतिबद्धता है।
इसरो के पूर्व वैज्ञानिक प्रो. दीपक सिंह ने अंतरिक्ष विज्ञान की असीम संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने IIT, IISER और IISc जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से आए छात्रों को डेटा-आधारित शोध और समाज की जरूरतों से जुड़ने की सलाह दी।
इस कार्यक्रम का सबसे दिलचस्प हिस्सा रहा 'साइंस कम्युनिकेटर्स पैनल डिस्कशन'। इसमें विशेषज्ञों ने बताया कि आज के डिजिटल दौर में प्रयोगशाला के शोध को जनता तक पहुँचाना कितना ज़रूरी है। छात्रों को वैज्ञानिकों से आमने-सामने सवाल पूछने और मार्गदर्शन लेने का भरपूर मौका मिला। यहाँ शॉर्टकट के बजाय दीर्घकालिक प्रभाव और 'शोर से अधिक सार' पर चर्चा हुई।
मालूम हो कि, साइएस्ट्रा के 5 साल पूरे होने पर संस्थापकों अखिल त्रिपाठी और विवेक द्विवेदी ने बताया कि उनकी संस्था ने अब तक 5 लाख से अधिक छात्रों को शोध से जोड़ा है। उनका लक्ष्य अब इंडस्ट्री और एकेडमी के बीच की खाई को पाटकर विज्ञान में सार्थक करियर के रास्ते खोलना है।