Edited By Manisha,Updated: 18 Mar, 2026 01:05 PM
फिल्म जब खुली किताब के बारे में डायरेक्टर सौरभ शुक्ला ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जी 5 पर 6 मार्च को रिलीज हुई रोमांटिक कॉमेडी-ड्रामा फिल्म जब खुली किताब। इस फिल्म को सौरभ शुक्ला द्वारा डायरेक्ट किया गया है। फिल्म की कहानी एक कपल की है जो तकरीबन 50 साल तक साथ रहने के बाद एक दूसरे से तलाक लेना चाहते है। इस फिल्म में पंकज कपूर और डिंपल कपाड़िया मुख्य किरदार में नजर आ रहे हैं। इनके अलावा फिल्म में अपार शक्ति खुराना, समीर सोनी जैसे कलाकार भी नजर आ रहे हैं। फिल्म के बारे में डायरेक्टर सौरभ शुक्ला ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
सवाल- फिल्म का नाम जब खुली किताब का आइडिया कहां से आया?
जवाब- जब मैं किसी कहानी पर काम करता हूं तो मैं हमेशा उस कहानी की आत्मा से जुड़ा टाइटल ढूंढता हूं। जब खुली किताब एक ऐसा ही टाइटल है, जिसमें थोड़ी रहस्यात्मकता भी है। यह लाइन अक्सर हम सुनते हैं भाई मेरी जिंदगी तो खुली किताब है। लेकिन फिल्म देखने के बाद आप समझ जाएंगे कि जब सच की किताब खुलती है तो हिसाब-किताब बहुत भारी पड़ सकता है। यही फिल्म का मूल संदेश भी है।
सवाल- यह कहानी कितनी अलग और इमोशनल है। आपने फिल्म में संदेश कैसे दिया?
जवाब- आप जानते हैं कहानीकार के लिए पहले यह जरूरी है कि कहानी रोचक और ड्रामेटिक हो। फिर, जैसे-जैसे कहानी बुनाई जाती है, लेखक का दृष्टिकोण, उसके समाज और रिश्तों को देखने का तरीका, सब कहानी में झलकता है। अंत में, अक्सर आप खुद भी नहीं जानते कि मुख्य संदेश क्या होगा, लेकिन कहानी के समाप्त होने पर सब स्पष्ट हो जाता है। हमारे यहां मुख्य क्रक्स यह है – “रिश्तों में सच बड़ी चीज है, सच से शिकायत नहीं होती।”
सवाल- फिल्म के कास्ट के बारे में बताइए। डिंपल कपाड़िया, पंकज कपूर यह सभी कैसे चुने गए?
जवाब- मैंने पंकज त्रिपाठी को गोपाल चंद्र नौटियाल के किरदार के लिए सोचा था तो मुझे उनके काम पर पूरा भरोसा था। फिल्म के दौरान ही उनसे पहली बार मुलाकात हुई और जब स्क्रिप्ट उनके पास गई, तो चार दिन बाद ही पंकज जी ने हां कह दिया जो मेरे लिए बहुत बड़ी चीज थी। वहीं डिंपल मैम को शुरुआत में अप्रोच करने में थोड़ी हिचक हो रही थी क्योंकि वह एक बड़ी स्टार हैं और उन्होंने कमर्शियल फिल्मों के साथ-साथ समानांतर सिनेमा में भी शानदार काम किया है। मुझे लगा था कि शायद वह इस फिल्म के लिए मना कर देंगी लेकिन जब स्क्रिप्ट भेजी गई तो तीसरे ही दिन उनका खुद फोन आया और उन्होंने न सिर्फ फिल्म करने की इच्छा जताई बल्कि कहा कि यह रोल वह ही करना चाहती हैं। अपार को मैंने अप्रोच किया तो वो भी काफी उत्साहित हुआ और उसने हां कर दी।
सवाल: इस फिल्म से ZEE5 और Applause Entertainment कब जुड़े?
जवाब: इस कहानी का विचार मुझे शुरुआत में आया तब मैं इस पर अकेले ही काम कर रहा था और इसे सीधे एक फिल्म के रूप में लिखना शुरू किया था। उसी दौरान आद्यम से एक प्रोडक्शन करने का निमंत्रण मिला जो मेरे लिए बहुत सम्मान की बात थी। तब मेरे मन में यह विचार आया कि चूंकि यह कहानी रिश्तों और किरदारों पर आधारित है इसलिए इसे पहले नाटक के रूप में मंचित करके दर्शकों की प्रतिक्रिया देखी जाए। मैंने इसे एक प्ले के रूप में लिखा और आद्यम में इसके 11 शो किए जिसमें जिस किरदार को बाद में पंकज त्रिपाठी ने फिल्म में निभाया वह किरदार मंच पर खुद मैंने निभाया क्योंकि उस समय उनके मन में जो अभिनेता थे वे व्यस्त थे। यह नाटक बहुत सफल रहा और दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली जिससे मुझे भरोसा हुआ कि कहानी का भावनात्मक केंद्र बहुत मजबूत है। इसी दौरान संयोग से समीर नायर का फोन आया और मुझे इस कहानी के बारे में सुनकर इसे फिल्म के रूप में बनाने का प्रस्ताव दिया जिसके बाद Applause Entertainment इससे जुड़ा और बाद में ZEE5 रिलीज़ पार्टनर बना।
सवाल- OTT के इस दौर और 90s के दौर में आपने बहुत बदलाव देखा होगा। कलाकारों और फिल्मों में क्या फर्क है?
जवाब- इस दुनिया में जो है सब सही है गलत कुछ नहीं है। कोई चीज सही है या गलत वो आपकी परिस्थिति पर डिपेंड करता है। बदलाव हमेशा होता है। OTT ने नए मेकर्स और पुराने कलाकारों को नया जीवन दिया है। आज कलाकार कॉमिक, गंभीर, डार्क या इंटेंस हर तरह के रोल कर सकते हैं। यह फ्लेक्सिबिलिटी उनके हुनर को दिखाती है। अच्छे कलाकार हर रोल निभा सकते हैं, बस अवसर और कहानी मिलनी चाहिए।
सवाल- एक अभिनेता और निर्देशक के रूप में आपको क्या सबसे ज्यादा आनंद देता है? एक्टिंग, डायरेक्शन या राइटिंग।
जवाब- यह थोड़ा मुश्किल सवाल है क्योंकि ये सब एक ही शरीर के हिस्से की तरह हैं। मैं सबका आनंद लेता हूं लेखन, निर्देशन और एक्टिंग, तीनों। हर हिस्से का अपना मज़ा और चुनौती है।
सवाल- आपने बड़े सितारों के साथ काम किया है। नए कलाकारों और पुराने सितारों में फर्क क्या है?
जवाब- सभी कलाकार समान रूप से पैशनेट होते हैं। फर्क बस समय और अनुभव का होता है। जो कलाकार समय की कसौटी पर खरा उतरते हैं वही लंबे समय तक स्टार बने रहते हैं।
सवाल- दर्शकों के लिए फिल्म का संदेश क्या है?
जवाब- यह फिल्म किसी संदेश देने के लिए नहीं बनाई गई, बल्कि यह जीवन का सच और रिश्तों की सुंदरता दर्शाती है। फिल्म हंसाती है, रुलाती है और आप इसे देखकर आनंद महसूस करेंगे।