Edited By Anu Malhotra,Updated: 20 Feb, 2026 06:40 PM

दुनिया तेजी से हेल्थकेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर बढ़ रही है, और अब दिल के मरीजों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। एक नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी में दावा किया गया है कि ‘क्वीन ऑफ हार्ट्स’ (Queen of Hearts) नाम का एआई प्लेटफॉर्म सेकेंडों में...
नेशनल डेस्क: दुनिया तेजी से हेल्थकेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर बढ़ रही है, और अब दिल के मरीजों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। एक नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी में दावा किया गया है कि ‘क्वीन ऑफ हार्ट्स’ (Queen of Hearts) नाम का एआई प्लेटफॉर्म सेकेंडों में खतरनाक हार्ट अटैक—even साइलेंट अटैक—की पहचान कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक समय पर इलाज सुनिश्चित कर हजारों जिंदगियां बचा सकती है।
भारत भी हेल्थ सेक्टर में एआई को बढ़ावा दे रहा है। हाल ही में दिल्ली में आयोजित वैश्विक एआई सम्मेलन में भारत और फ्रांस ने “AI और हेल्थ” के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई। ऐसे में यह तकनीक भारतीय मरीजों के लिए भी गेमचेंजर साबित हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुआ बड़ा अध्ययन
यह रिसर्च अमेरिका और यूरोप के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के सहयोग से की गई। अध्ययन में शामिल प्रमुख केंद्र थे:
- The Christ Hospital
- UC Davis Health
- UTHealth Houston
- AZORG
करीब 8,000 से अधिक मरीजों के ईसीजी डेटा का विश्लेषण किया गया, जिन्हें सीने में दर्द या हार्ट अटैक के संदिग्ध लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती किया गया था।
सेकेंडों में रिपोर्ट पढ़ेगा AI
स्टडी के वरिष्ठ लेखक Dr. Timothy D. Henry के अनुसार, यह तकनीक मरीज की ईसीजी रिपोर्ट को कुछ ही सेकेंड में पढ़कर गंभीर हार्ट अटैक की आशंका जता सकती है। इससे डॉक्टरों को तुरंत निर्णय लेने में मदद मिलती है और इलाज शुरू करने में देरी नहीं होती।मुख्य लेखक Dr. Robert Herman का कहना है कि एआई आधारित ईसीजी विश्लेषण गंभीर मामलों की तेजी से पहचान करता है, साथ ही अनावश्यक इमरजेंसी अलर्ट को भी कम करता है।
कितना भरोसेमंद है ‘क्वीन ऑफ हार्ट्स’?
- अध्ययन के नतीजों के अनुसार:
- AI ने 92% मामलों में सही पहचान की
- पारंपरिक तरीकों की सटीकता लगभग 71% रही
- गलत अलार्म (False Positive) की दर 42% से घटकर 8% रह गई
विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक उन सूक्ष्म संकेतों को भी पकड़ लेती है जो कई बार अनुभवी डॉक्टरों या सामान्य मशीनों से छूट जाते हैं। खासकर ‘STEMI’ जैसे गंभीर हार्ट अटैक के मामलों में यह बेहद उपयोगी साबित हुई।
90 मिनट का गोल्डन टाइम: AI बनेगा लाइफसेवर
कार्डियोलॉजिस्ट बताते हैं कि हार्ट अटैक के बाद पहले 90 मिनट बेहद अहम होते हैं। अगर इस समय के भीतर ब्लॉकेज नहीं खोला गया, तो मृत्यु का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।
भारत में बड़ी संख्या में मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि आधे से ज्यादा मौतें अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो जाती हैं। ऐसे में अगर एआई आधारित सिस्टम तेजी से खतरे का संकेत दे, तो मरीज को “गोल्डन आवर” के भीतर इलाज मिल सकता है।
भारतीय मरीजों के लिए क्यों खास?
भारत में हृदय रोग कम उम्र में भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के बीच, एआई-संचालित ईसीजी सिस्टम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी सटीक जांच संभव बना सकता है।
अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर लागू होती है, तो यह न केवल शहरी बल्कि ग्रामीण भारत में भी हार्ट अटैक से होने वाली मौतों को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।