Exclusive Interview: वायुसेना के शौर्य को जानने का मौका देगी ऑपरेशन सफेद सागर- जिम्मी शेरगिल

Edited By Updated: 03 Aug, 2026 11:02 AM

exclusive interview of opersation safed sagar cast with punjab kesari

इस सीरीज ऑपरेशन सफेद सागर के बारे में कास्ट सिद्धार्थ, जिमी शेरगिल और निर्माता अभिजीत सिंह परमार और कुशल श्रीवास्तव ने  पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जब भी देश की रक्षा की बात होती है तो सबसे पहले हमारे दिमाग में सेना के जवानों की तस्वीर उभरती है। आर्मी के शौर्य और बलिदान पर कई बेहतरीन फिल्में और सीरीज बन चुकी हैं लेकिन भारतीय एयरफोर्स के जज़्बे, चुनौतियों और संघर्ष को पर्दे पर कम ही दिखाया गया है। अब इसी कमी को पूरा करने आ रही है एक नई सीरीज जो 7 अगस्त को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। इस सीरीज का नाम है ऑपरेशन सफेद सागर। इस सीरीज का निर्देशन ओनी सेन ने किया है, जबकि इसके निर्माता अभिजीत सिंह परमार और कुशल श्रीवास्तव हैं। सीरीज में सिद्धार्थ, जिम्मी शेरगिल, अभय वर्मा और मिहिर आहूजा मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। इस सीरीज के बारे में कास्ट सिद्धार्थ, जिमी शेरगिल और निर्माता अभिजीत सिंह परमार और कुशल श्रीवास्तव ने  पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

जिम्मी शेरगिल

प्रश्न: ट्रेलर देखने के बाद लगा कि कारगिल युद्ध के कई ऐसे पहलू हैं जिनसे लोग आज भी अनजान हैं। इस कहानी में आपको सबसे ज्यादा क्या प्रभावित कर गया?

जिम्मी शेरगिल: किसी भी फिल्म या सीरीज का पहला असर कलाकारों पर ही पड़ता है क्योंकि सबसे पहले हम उसकी स्क्रिप्ट पढ़ते हैं। इस स्क्रिप्ट ने भी हमें कई ऐसी बातें बताईं जिनके बारे में पहले जानकारी नहीं थी। हम सभी कारगिल युद्ध को आर्मी के नजरिए से जानते थे लेकिन भारतीय वायुसेना की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण थी यह बहुत कम लोगों को पता है। सीरीज में युद्ध से पहले की तैयारियों और कई अनसुनी घटनाओं को भी दिखाया गया है। मुझे लगता है कि इसे देखने के बाद लोगों को इतिहास का एक ऐसा पक्ष पता चलेगा जिसके बारे में उन्होंने पहले कभी विस्तार से नहीं जाना।

प्रश्न: आपने बताया था कि आपका सपना भी भारतीय सेना में जाने का था। बचपन का माहौल कैसा था?

जिम्मी शेरगिल: हमारे समय में लगभग हर युवा सशस्त्र बलों में जाना चाहता था। हमारे परिवारों में भी कोई-न-कोई सेना से जुड़ा होता था इसलिए बचपन से ही देश सेवा का माहौल मिलता था। मुझे भी पूरा विश्वास था कि मैं चयनित हो जाऊंगा लेकिन उस समय कटऑफ इतना ज्यादा था कि मैं सफल नहीं हो पाया। आज भी मैं युवाओं से यही कहता हूं कि अगर उनमें क्षमता और जज्बा है तो जरूर सशस्त्र बलों में जाने की कोशिश करें। फिल्मों के सुपरहीरो अलग होते हैं, लेकिन असली हीरो हमारे सैनिक हैं।

प्रश्न: युवा कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

जिम्मी शेरगिल: बहुत शानदार। पुराने दिन भी याद आ गए क्योंकि करियर की शुरुआत में मैंने भी ऐसी ट्रेनिंग ली थी। इस शो के सभी युवा कलाकार बेहद प्रतिभाशाली हैं और हर किसी ने अपने किरदार पर पूरी मेहनत की है। सेट का माहौल हमेशा सकारात्मक रहा। जब पूरी टीम एक ही सोच के साथ काम करती है तो उसका असर स्क्रीन पर भी साफ दिखाई देता है। मुझे विश्वास है कि दर्शक इस शो के हर किरदार को याद रखेंगे।

प्रश्न: इस सीरीज से आप चाहते हैं कि युवा क्या सीख लेकर जाएं?

जिम्मी शेरगिल:  मेरा संदेश बहुत सीधा है। अगर आपके अंदर देश की सेवा करने का जज्बा है और आप खुद को उसके योग्य मानते हैं तो भारतीय सशस्त्र बलों में जरूर जाने की कोशिश करें। यह सिर्फ एक करियर नहीं, बल्कि अनुशासन, सम्मान और जिम्मेदारी से भरी जिंदगी है। शूटिंग के दौरान हमें एयरफोर्स के करीब से काम करने का मौका मिला और तभी एहसास हुआ कि हमारे असली हीरो कौन हैं। उम्मीद है कि ऑपरेशन सफेद सागर देखने के बाद युवा उन नायकों को और करीब से जानेंगे और उनसे प्रेरणा लेंगे।

कुशल श्रीवास्तव
प्रश्न: ऑपरेशन सफेद सागर की कहानी की शुरुआत कैसे हुई?

कुशल: मैं 1999 से 2006 तक भारतीय वायुसेना में रहा हूं। कारगिल युद्ध के दौरान जो कुछ देखा और महसूस किया, वह हमेशा मेरे साथ रहा। बाद में जब फिल्मों में आया तो लगा कि एयरफोर्स को आज तक सही तरीके से पर्दे पर नहीं दिखाया गया। मैंने इस विषय पर लंबे समय तक रिसर्च की, युद्ध में शामिल अधिकारियों से मुलाकात की और उनकी कहानियां सुनीं। तभी महसूस हुआ कि यह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि विस्तार से बताई जाने वाली कहानी है। इसके बाद अभिजीत से जुड़ने के बाद हमने इसे वेब सीरीज के रूप में विकसित करना शुरू किया।

प्रश्न: जिमी शेरगिल और बाकी कलाकार इस प्रोजेक्ट से कैसे जुड़े?

कुशल: जिमी पाजी से मेरा रिश्ता काफी पुराना है। मैंने अपने करियर की पहली फिल्म में उन्हें असिस्ट किया था। उसके बाद भी हम लगातार संपर्क में रहे। एक बार उन्होंने मुझसे कहा था, “पहले कुछ अच्छा लिख।” वह बात मेरे दिमाग में रह गई। जब ऑपरेशन सफेद सागर की स्क्रिप्ट तैयार हुई तो सबसे पहले उन्हीं से बात की। सिर्फ जिमी सर ही नहीं, पूरी कास्ट ने कहानी पर भरोसा दिखाया और बिना किसी हिचक के इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनी। सभी कलाकारों ने एयरफोर्स बेस पर ट्रेनिंग ली और अपने किरदारों के लिए पूरी मेहनत की।

अभिजीत सिंह परमार
प्रश्न: आपको इस कहानी ने किस तरह जोड़ा?

अभिजीत: मैंने कारगिल युद्ध पर काफी पढ़ा था लेकिन एयरफोर्स की भूमिका के बारे में मुझे भी बहुत कम जानकारी थी। कुशल सर से मिलने के बाद पहली बार उस दुनिया को करीब से समझने का मौका मिला। उनकी छोटी-छोटी वास्तविक कहानियों ने मुझे बहुत प्रभावित किया। हमने लगभग 50–60 एयरफोर्स वेटरन्स से बातचीत की और कई महीनों तक रिसर्च की। धीरे-धीरे यह एक बड़े डॉक्यूमेंट में बदल गया जिसे लेकर हम नेटफ्लिक्स पहुंचे। उस समय उत्साह भी था और जिम्मेदारी भी क्योंकि इतने बड़े स्तर पर इस तरह का प्रोजेक्ट पहले नहीं बना था।


प्रश्न:  कास्टिंग को लेकर आपका अनुभव कैसा रहा?

अभिजीत: मुझे हमेशा लगता है कि इस कहानी ने अपने कलाकार खुद चुने। लगभग पूरी कास्ट हमारी पहली पसंद थी और सभी ने इस प्रोजेक्ट को पूरे दिल से स्वीकार किया। वेब सीरीज की शूटिंग लंबी चलती है इसलिए कलाकारों को लंबे समय तक अपने किरदार और लुक में बने रहना पड़ता है। जिमी सर और सिद्धार्थ सहित सभी कलाकारों ने इस जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाया। इसी समर्पण ने पूरी टीम को और मजबूत बनाया।

संजय राउतराय
प्रश्न: जब यह प्रोजेक्ट आपके पास आया तो आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?

संजय: जब हमने करीब 200 पन्नों का पूरा डॉक्यूमेंट पढ़ा तो उसी समय तय कर लिया कि यह कहानी जरूर बननी चाहिए। फाइटर जेट और एयरफोर्स की दुनिया अपने आप में बेहद रोमांचक है और मुझे लगा कि इसे बड़े स्तर पर दर्शकों तक पहुंचाना जरूरी है। बाद में नेटफ्लिक्स भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ गया। इससे हमें भरोसा मिला कि हम इस कहानी को उसी स्केल और गुणवत्ता के साथ बना पाएंगे जिसकी यह हकदार है।

प्रश्न: इतनी बड़ी स्टारकास्ट को एक साथ लाना कितना मुश्किल था?

संजय: इसका पूरा श्रेय कुशल, अभिजीत और निर्देशक ओनी को जाता है। उन्होंने शुरुआत से ही बहुत स्पष्ट सोच के साथ कास्टिंग की। किस कलाकार को कौन-सा किरदार निभाना है, यह सब पहले से तय था। अच्छी बात यह रही कि जिन कलाकारों से संपर्क किया गया, लगभग सभी ने कहानी सुनने के बाद तुरंत हामी भर दी।

सिद्धार्थ

प्रश्न: ऑपरेशन सफेद सागर से जुड़ने का अनुभव कैसा रहा? अपने किरदार के बारे में बताइए।

सिद्धार्थ: मेरे लिए यह सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं बल्कि मेरे करियर का सबसे बड़ा सम्मान है। मैं किरदार शब्द का इस्तेमाल भी थोड़ा संभलकर करता हूं, क्योंकि मैं किसी काल्पनिक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक ऐसे असली हीरो का रोल निभा रहा हूं जिसने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। मेरी कोशिश सिर्फ वर्दी पहनने या पायलट जैसा दिखने की नहीं थी बल्कि उस इंसान की सोच, संवेदनाओं और व्यक्तित्व को ईमानदारी से समझकर पर्दे पर उतारने की थी। मुझे लगता है कि यह जिम्मेदारी किसी भी अभिनेता के लिए बहुत बड़ी होती है।


प्रश्न: इस कहानी में ऐसी कौन-सी बात थी जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया?

सिद्धार्थ: जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी तो सबसे पहले यही महसूस हुआ कि यह कोई सामान्य देशभक्ति पर आधारित प्रोजेक्ट नहीं है। आजकल देशभक्ति को दिखाने के कई तरीके हैं लेकिन इस कहानी में कहीं भी बनावटीपन नहीं है। यह कारगिल युद्ध के उस हिस्से को पूरी सच्चाई और सम्मान के साथ सामने लाती है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। पूरी टीम का उद्देश्य भी सिर्फ एक था कि इस कहानी को पूरी ईमानदारी से बताया जाए और यही बात मुझे सबसे ज्यादा पसंद आई।

प्रश्न: स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा का किरदार निभाना कितना चुनौतीपूर्ण रहा?

सिद्धार्थ: बहुत चुनौतीपूर्ण। जब आप किसी वास्तविक नायक का किरदार निभाते हैं तो जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। आपको सिर्फ अभिनय नहीं करना होता, बल्कि उस व्यक्ति के व्यक्तित्व, सोच और भावनाओं को समझना पड़ता है। हर दिन कुछ नया सीखने को मिला। मैं खुश हूं कि इस सीरीज के जरिए नई पीढ़ी स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा जैसे सच्चे हीरो के बारे में जान पाएगी।

 

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