तीन पीढ़‍ियों की यादों वाली फिल्म 'बॉर्डर 2' का हिस्सा बनना गर्व की बात है: परमवीर सिंह चीमा

Edited By Updated: 23 Jan, 2026 06:29 PM

paramvir singh cheema exclusive interview with punjab kesari

परमवीर सिंह चीमा ने पंजाब केसरी/नवोदय टाइम्स/जगबाणी/हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अभिनेता परमवीर सिंह चीमा अब बड़े पर्दे पर अपने करियर की नई शुरुआत करने जा रहे हैं और वो भी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बॉर्डर 2’ के साथ। हाल ही में विक्रमादित्य मोटवानी की चर्चित फिल्म ‘ब्लैक वारंट’ और तेरे इश्क में दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने वाले परमवीर, इस नई फिल्म का हिस्सा बनने को लेकर बेहद उत्साहित हैं।‘बॉर्डर 2’ को लेकर परमवीर सिंह चीमा ने पंजाब केसरी/नवोदय टाइम्स/जगबाणी/हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

सवाल: पंजाब में खेती-किसानी करने वाले परिवार से होने के बावजूद आपको अभिनय की ओर रुचि कैसे हुई?
मैंने सोचा नहीं था कभी मैं एक्टर बनूंगा। मुझे आईडिया भी नहीं था कि ये क्या है। वो तो कुछ मेरे दोस्त थे, वो मुझे मेरे कॉलेज में एक शो हुआ करता था तो मेरे एक फ्रेंड ने मुझे बोला कि तू मेरे लिए वॉक कर ले। तो मैंने कहा ठीक है कर लूंगा। मेरी हाइट अच्छी थी तो मैंने वॉक किया तो मैं वो शो जीता। मुझे मजा आया करके। उसके बाद मुझे लगा चलो फैशन वगैरह किया जाए। फिर मैं दिल्ली शिफ्ट हो गया। मैंने घर वालों को बोला मुझे दिल्ली शिफ्ट होना है, मॉडलिंग, करनी है। फिर मुझे एक प्रोजेक्ट कुछ मिला ऐड था कोई फीचर कास्ट में था। उन्होंने बॉम्बे की फ्लाइट की टिकट भी दी और सात हजार रुपये भी देंगे। तो बस ऐसे ही धीरे-धीरे मेरे एक्टिंग करियर की शुरुआत हुई।

सवाल: आपने 'टब्बर', 'चमक', जैसे कई अलग अलग किरदार निभाए हैं कौन-सा किरदार आपके लिए सबसे मुश्किल या यादगार रहा है?
याद तो मुझे सारे हैं जितने मैंने अभी तक प्ले किए हैं। सबसे ज्यादा मुश्किल मेरे लिए चमक का कैरेक्टर प्ले करना  था। क्योंकि वो इसमें सिंगर भी था और बहुत ज्यादा अग्रेशन था कैरेक्टर में और बाल लंबे थे और जैसे वो कपड़े पहनता था कैरेक्टर में, वैसे कपड़े रियल लाइफ में पहनता ही नहीं हूं। मैंने लाइफ में कभी लंबे बाल किए नहीं थे। मैं छोटे छोटे बाल रखता जैसे पंजाब के लड़के जैसे बाल रखते हैं।  कभी लंबे करने का सोचा भी नहीं था। फिर बाकी तो परफॉर्मेंस होती और क्राफ्ट है। जैस -जैसे करता गया तो उसमें भी कंफर्ट हो गया। पर चमक का किरदार मुश्किल रहा थोड़ा।

सवाल: 'बॉर्डर 2' जैसी फिल्म फ्रेंचाइज़ी का हिस्सा बनना आपके लिए क्या मायने रखता है?
पहले मुझे आइडिया नहीं था कि इतनी बड़ी चीज होगी। बॉर्डर है, ठीक है फिल्म है ठीक है, करते हैं। मतलब नॉर्मल था। मैं जानना चाहूंगा रोल क्या है। मैं एक बार डायरेक्टर से मिलना चाहूंगा। तो जब मैंने लोगों को बताना शुरू किया, उनका रिएक्शन होता था तू बॉर्डर कर रहा है, तू बॉर्डर कर रहा है। मेरे पापा भी बोले तू बॉर्डर कर रहा है। मैंने कहा हां। तो फिर मुझे लगा कि यार ये बहुत बड़ी चीज है। बॉर्डर में जो लोगों का रिएक्शन था, वो बहुत ज्यादा एक्सेप्शनल था। तो फिर मुझे समझ आया कि अच्छा मास का ऑडियंस का क्या रहता है। एक ऐसी फिल्म थी जिसे मेरे दादी ने भी देखी है, मेरे पापा ने भी देखी है, मैंने भी देखी है। तीन जेनरेशन्स देख चुकी हैं।

सवाल: क्या बॉर्डर-2 के लिए आपको कोई विशेष ट्रेनिंग या फिजिकल तैयारी करनी पड़ी?
हां, काफी तैयारी की है। अनुराग सर ने कहा था एक्शन है। जब मैं मिला उन्होंने मुझे बताया क्या, क्या है तो थोड़ा एक्शन की तैयारी की। फिर अपनी बॉडी फ्लेक्सिबिलिटी की, योगा किया जिससे बॉडी खुल जाए पूरी और उसके बाद जो लुक था, थोड़ा सा मैंने वेट गेन किया था बॉर्डर के लिए। ताकि मैं हरियाणे का जाट दिख सकूं और वो तब की कहानी है। तो थोड़ा सा तो वेट हो बॉडी में, उसके बाद मूछ ग्रो करनी थी, तो मैंने मूंछ पूरी बढ़ाई। जब तक हम पहुंचे, शूट पर तो सब कुछ सही था। 

सवाल: सनी देओल जैसे अनुभवी कलाकार के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
सनी सर को मैंने देखकर पहली बार ही फील किया कि अच्छा स्टार का ऑरा इतना बड़ा होता है। आज तक मैंने ऐसा ऑरा फील नहीं किया था कभी। वह जब आए सेट पर तो अलग ही माहौल था। मतलब सब लोग और अटेंटिव हो जाते थे। मुझे भी मजा आने लगा था। मैंने सोचा सनी सर को रोज सेट पर आना चाहिए। इतना अच्छे से सब लोग काम करते हैं। मैं उनसे मिला भी, बात भी की। जब मैंने  फर्स्ट टाइम बात की तो मैंने कहा सर, मैं कुछ बोला ही नहीं, बोल ही नहीं पाया। मैंने बस यही बोला, बड़ा अच्छा लगा आपको मिलके। तो वो तो शर्मा ही रहे थे। 

सवाल: जब आप अपने गांव या शहर वापस जाते हैं, तो वहां के लोग आपकी सफलता पर कैसा रिएक्शन देते हैं?
घरवाले तो बहुत खुश हैं और कुछ दोस्त भी बहुत खुश हैं। लेकिन एक चीज है आपको समझ आ जाता है कि सबके चेहरे दिखने लगते हैं, असली वाले। जो लोग पहले बुलाते नहीं थे, अब बोलते हैं आजा यार तू मिलता ही नहीं। पहले भी नहीं मिलता था। अभी एकदम से आप सबके लिए इतने इंपॉर्टेंट हो जाते हो। तो वो चीज भी समझ आने लगी है।

सवाल: आप युवा कलाकारों को क्या संदेश देना चाहेंगे जो छोटे शहरों से हैं और अभिनय के क्षेत्र में आना चाहते हैं?
मैं यही मैसेज देना चाहूंगा कि एक तो थोड़ा अंदर से थोड़ा स्ट्रांग होके आना पड़ता है कि धीरे-धीरे बॉम्बे भी स्ट्रांग कर देता है। लेकिन ऑलरेडी अपनी विल पावर बहुत स्ट्रांग रख के आना पड़ता है और बैकअप प्लान ज्यादा नहीं रखोगे तो शायद आप जो मेन प्लान है उसके ऊपर फोकस करोगे। अगर आप ऑलरेडी बैकअप प्लान रख के आओगे तो मेन प्लान पे फोकस उतना कर नहीं पाओगे, क्योंकि आपको पता होगा पीछे कोई और प्लान है हमारे पास और अगर आना है तो मेहनत करने आओ। मतलब मस्ती करना भी एक चीज है, लेकिन सिर्फ मस्ती नहीं।

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