पिछले 65 साल से जारी संघर्ष के बाद नेपाल में बना नया संविधान

Edited By Updated: 20 Sep, 2015 10:56 PM

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निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा निर्मित संविधान की आंकाक्षा को लेकर नेपाल की जनता का पिछले 65 साल से जारी संघर्ष नए संंविधान के अपनाए जाते ही आखिरकार आज खत्म हो गया।

काठमांडू: निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा निर्मित संविधान की आंकाक्षा को लेकर नेपाल की जनता का पिछले 65 साल से जारी संघर्ष नए संंविधान के अपनाए जाते ही आखिरकार आज खत्म हो गया। लगभग 250 साल तक राजशाह के नखरे उठाने के बाद नेपाल की जनता सही मायने में संप्रभुत्व देश की नागरिक बनने में सफल रही। नेपाल के राष्ट्रपति राम बरन यादव ने आज नेपाल के नये संविधान को लागू करने की घोषणा की। 

 
उन्होंने संविधान सभा की विशेष बैठक में यह घोषणा की। बैठक में नये संविधान की प्रतियां भी लोगों में वितरित की गई। संविधान सभा की बैठक मे उपराष्ट्रपति परमानंद झा, प्रधानमंत्री सुशील कुमार कोइराला तथा मुख्य न्यायाधीश कल्याण श्रेष्ठ भी मौजूद थे। श्री यादव ने कहा,‘‘हमारे देश में विभिन्न जातियों, भाषाओं, धर्मों तथा संस्कृतियों का मेल है। 
 
इस नए संविधान को अपनाने से यहां रहने वाले सभी भाई-बहनों के अधिकारों की रक्षा होगी। ‘‘राजधानी में दो हजार से अधिक लोगों ने संविधान लागू होने पर खुशियां मनाई तथा संविधान सभा भवन के सामने देश के झंडे के साथ जश्न मनाते हुए फोटो खिंचवाए। संविधान अपनाए जाने का जश्न मनाने के लिए दो दिन का सरकारी अवकाश घोषित किया गया है लेकिन तराई क्षेत्र की पार्टियों ने कहा है कि वे अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगी।   
 
नेपाल में नये संविधान का व्यापक विरोध हो रहा है। हालांकि संविधान अंगीकार करने के बाद यहां हिंसा की कोई बड़ी घटना नहीं हुई लेकिन बीरगंज में कफ्र्यू के दौरान पुलिस से झड़पों में तीन लोग घायल हुए हैं। संविधान में मधेशी समुदाय का अधिकारों में कमी किए जाने को लेकर पिछले एक महीने से आम हड़ताल जारी है। इस हिंसक आंदोलन में कई लोगों की मौत हो चुकी है। गत अगस्त से जारी विरोध प्रदर्शन में अब तक 44 से अधिक लोगों की मौत हो गयी है।  

नेपाल के नए संविधान में नया क्या, 10 बातें
 
1. नेपाल अब संघीय गणराज्य होगा. संघवाद इसका मूल सिद्धांत है. यानी राजशाही का औपचारिक अंत।
2. धर्मनिरपेक्षता संविधान का दूसरा मूल सिद्धांत है. यानी नेपाल अब हिंदू राष्ट्र से धर्मनिरपेक्ष देश बन गया है।
3. देश में अब सात नए राज्य होंगे, इन राज्यों, केंद्र और लॉकल बॉडी की शक्तियों की अलग लिस्ट होगी।
4. इन्क्लूसिवनेस यानी आर्थिक समानता आधारित समतामूलक समाज. पुराने ढांचे में एक समुदाय का प्रभुत्व था।
5. आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मूल अधिकारों की लंबी लिस्ट है. इनके लिए कोर्ट जाने का अधिकार।
6. नेपाली महिलाओं को विदेशी पुरुष से शादी करने पर अपने बच्चों को नेपाली नागरिकता देने का अधिकार।
7. अब नेपाल में संसदीय सरकार होगी. संविधान परिषद मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करेगी. स्वतंत्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका होगी।
8. नए संविधान के तहत न्यायिक परिषद सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और जिला जजों को नॉमिनेट करेगी।
9. मूल भावना यह है कि नेपाल के शासन में हर नेपाली नागरिक की बराबर की भागीदारी हो।
10. संविधान की प्रस्तावना में बहुदलीय लोकतांत्रिक प्रणाली, मानवाधिकार, वोट देने का अधिकार, प्रेस की आजादी, और कानून आधारित समाजवाद की बुनियाद की बात कही गई है।

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